नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) सरकार ने शनिवार को राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत ग्रीन हाइड्रोजन के उप-उत्पादों के कारोबार को तेज करने के लिए हरित अमोनिया और हरित मेथेनॉल के मानकों की घोषणा की।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने चार जनवरी, 2023 को 19,744 करोड़ रुपये के शुरुआती परिव्यय के साथ इस मिशन को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और इसके उप-उत्पादों के उत्पादन, उपयोग और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाना है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की प्रगति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत सरकार ने 27 फरवरी, 2026 को भारत के लिए हरित अमोनिया और हरित मेथेनॉल मानकों को अधिसूचित किया।
मंत्रालय द्वारा जारी मानक उन उत्सर्जन सीमाओं और पात्रता शर्तों को रेखांकित करते हैं, जिन्हें अमोनिया और मेथेनॉल को ‘हरित’ के रूप में वर्गीकृत करने के लिए पूरा किया जाना चाहिए। यानी इन्हें नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त हरित हाइड्रोजन का उपयोग करके उत्पादित किया जाना चाहिए।
भारत के लिए हरित अमोनिया मानक के तहत हरित हाइड्रोजन उत्पादन, अमोनिया संश्लेषण, शुद्धिकरण, संपीड़न और मौके पर भंडारण से उत्पन्न कुल गैर-बायोजेनिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन प्रति किलोग्राम अमोनिया पर 0.38 किलोग्राम कार्बन डाईऑक्साइड से अधिक नहीं होना चाहिए। इसकी गणना पिछले 12 महीनों के औसत के रूप में की जाएगी।
भाषा पाण्डेय
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