भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 300 गीगावाट के पार, जयपुर में पहला रोडशो
भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 300 गीगावाट के पार, जयपुर में पहला रोडशो
जयपुर, 24 अगस्त (भाषा) भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता 300 गीगावाट के पार पहुंच गई है और देश ने 2030 तक 500 गीगावाट क्षमता हासिल करने के लक्ष्य का 60 प्रतिशत से अधिक पूरा कर लिया है। यह जानकारी सोमवार को जयपुर में आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन और प्रदर्शनी (बीआरई समिट) 2026 के पहले क्षेत्रीय रोड शो में दी गई।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा आयोजित इस रोडशो में राजस्थान सरकार, राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड (आरआरईसीएल), भारतीय पवन टर्बाइन निर्माता संघ (आईडब्ल्यूटीएमए), पवन ऊर्जा स्वतंत्र विद्युत उत्पादक संघ (डब्ल्यूआईपीपीए) और सतत परियोजना विकास संघ (एसपीडीए) के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, 31 जुलाई, 2026 तक देश की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता 300.50 गीगावाट दर्ज की गई, जो कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 54 प्रतिशत से अधिक है।
अधिकारियों ने बताया कि भारत मंडपम, नयी दिल्ली में दो से पांच नवंबर तक होने वाले भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन और प्रदर्शनी 2026 से पहले देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जयपुर में आयोजित कार्यक्रम इस श्रृंखला का पहला रोडशो था।
राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रोहित गुप्ता ने कहा कि राजस्थान सौर ऊर्जा के साथ-साथ पवन-सौर हाइब्रिड परियोजनाओं, बैटरी ऊर्जा भंडारण और हरित हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहा है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजेश कुलहरि ने कहा कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में राजस्थान जैसे संसाधन संपन्न राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि बीआरई समिट-2026 स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े निवेशकों, उद्योगों, प्रौद्योगिकी कंपनियों और सरकारों को एक मंच पर लाएगा।
भारतीय पवन टर्बाइन निर्माता संघ के सचिव दिनेश जगदले ने कहा कि समिट का उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकारों, निवेशकों, वित्तीय संस्थानों, प्रौद्योगिकी साझेदारों और उद्योग संगठनों के बीच सहयोग को मजबूत करना है।
पवन ऊर्जा स्वतंत्र विद्युत उत्पादक संघ के कोषाध्यक्ष नवीन खंडेलवाल ने कहा कि पवन ऊर्जा सौर ऊर्जा का पूरक है और चौबीसों घंटे बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद करती है।
रोडशो के दौरान सम्मेलन की रूपरेखा, निवेश के अवसरों और उद्योग की भागीदारी से संबंधित जानकारी दी गई। कार्यक्रम में भारत की अक्षय ऊर्जा यात्रा और आगामी समिट पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन भी किया गया।
मंत्रालय के वैज्ञानिक पी.के. दास ने समिट के प्रमुख विषयों और वैश्विक एवं घरेलू कंपनियों के लिए भागीदारी के अवसरों की जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि जयपुर के बाद रोडशो मुंबई, हैदराबाद, अहमदाबाद, लखनऊ, बेंगलूरु और कोलकाता में आयोजित किए जाने प्रस्तावित हैं।
इसमें 75 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। आयोजन में 20 से अधिक राज्य सरकारों, 250 से अधिक उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों और 500 से अधिक वक्ताओं के भाग लेने की उम्मीद है।
भाषा बाकोलिया राजकुमार अजय
अजय

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