उद्योग को आरएंडडी पर खर्च बढ़ाना होगा, संरक्षणवाद की प्रवृत्ति छोड़नी होगी: नीति आयोग सदस्य

उद्योग को आरएंडडी पर खर्च बढ़ाना होगा, संरक्षणवाद की प्रवृत्ति छोड़नी होगी: नीति आयोग सदस्य

उद्योग को आरएंडडी पर खर्च बढ़ाना होगा, संरक्षणवाद की प्रवृत्ति छोड़नी होगी: नीति आयोग सदस्य
Modified Date: May 12, 2026 / 04:51 pm IST
Published Date: May 12, 2026 4:51 pm IST

नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने मंगलवार को कहा कि सरकार सुधार जारी रखेगी और भरोसा-आधारित शासन के मूलभूत पहलुओं पर काम करेगी। हालांकि, उद्योग को अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) पर निवेश बढ़ाना होगा और संरक्षणवाद की प्रवृत्ति छोड़नी होगी ताकि भारत वैश्विक उत्पादन एवं नवाचार का आकर्षक केंद्र बन सके।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के वार्षिक व्यापार सम्मेलन में गौबा ने कहा कि सरकार सुधार एजेंडा को जारी रखेगी लेकिन उद्योग को कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देना होगा जिसमें अनुसंधान एवं विकास में निवेश ‘‘पहला’’ मुद्दा है।

उन्होंने कहा, ‘‘ जैसा कि हम सभी जानते हैं कि भारत का अनुसंधान एवं विकास पर कुल व्यय कम है। यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग 0.7 प्रतिशत पर अटका हुआ है जो वैश्विक औसत 2.3 प्रतिशत से काफी नीचे है। यह दक्षिण कोरिया तथा इजराइल जैसे देशों से बहुत कम है। इस 0.7 प्रतिशत में से 60 प्रतिशत सरकार द्वारा वित्तपोषित है।’’

गौबा ने कहा, ‘‘ मेरा मानना है कि भारतीय उद्योग को अनुसंधान एवं विकास में अधिक निवेश करना चाहिए एवं प्रौद्योगिकी आयात करने से उसे विकसित करने की ओर बढ़ना चाहिए। आरएंडडी में निवेश लागत नहीं है, यह रणनीतिक बढ़त है।’’

उन्होंने भारतीय उद्योग से यह भी आग्रह किया कि वह वैश्विक प्रतिस्पर्धा की चुनौती को स्वीकार करे, खासकर तब जब देश अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) कर रहा है।

नीति आयोग के सदस्य ने कहा, ‘‘ भारतीय उद्योग को संरक्षणवाद की अपनी प्रवृत्ति छोड़नी होगी। भारत सरकार ने ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और न्यूजीलैंड के साथ महत्वपूर्ण व्यापार समझौते किए हैं और कई अन्य प्रक्रिया में हैं। ये भारतीय निर्यातकों के लिए नए बड़े बाजार खोलेंगे लेकिन मुक्त व्यापार का सिद्धांत पारस्परिकता की मांग करता है।’’

गौबा ने इस बात पर जोर दिया कि उद्योग मानव संसाधन के कौशल विकास पर ध्यान दे क्योंकि सरकार अकेले यह नहीं कर सकती।

उन्होंने कहा, ‘‘ सरकार ने ‘स्किल इंडिया मिशन’ के माध्यम से महत्वपूर्ण निवेश किए हैं। मेरा मानना है कि कौशल विकास केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं हो सकता। उद्योग 4.0, कृत्रिम मेधा (एआई) और स्वचालन के उदय ने कार्यबल के कौशल विकास को अस्तित्व का प्रश्न बना दिया है।’’

सुधारों पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने अगली पीढ़ी के सुधार शुरू किए हैं। 1991 के सुधारों ने औद्योगिक लाइसेंस व्यवस्था को समाप्त किया, लेकिन ‘‘लाइसेंस राज’’ को नहीं।

भाषा निहारिका अजय

अजय


लेखक के बारे में