उद्योग जगत दूसरी तिमाही के लिए उम्मीद से भरा, सीआईआई का कारोबारी भरोसा सूचकांक उच्चतम स्तर पर

उद्योग जगत दूसरी तिमाही के लिए उम्मीद से भरा, सीआईआई का कारोबारी भरोसा सूचकांक उच्चतम स्तर पर

उद्योग जगत दूसरी तिमाही के लिए उम्मीद से भरा, सीआईआई का कारोबारी भरोसा सूचकांक उच्चतम स्तर पर
Modified Date: September 7, 2026 / 08:35 pm IST
Published Date: September 7, 2026 8:35 pm IST

नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) उद्योग जगत चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही को लेकर उम्मीद से भरा है। इसका कारण पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न बाधाएं धीरे-धीरे कम होने और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार बने रहने की उम्मीद है। उद्योग मंडल सीआईआई के कारोबारी भरोसा सूचकांक (बीसीआई) से यह पता चलता है।

यह सूचकांक अप्रैल-जून तिमाही में बढ़कर 66.0 हो गया, जो पिछली तिमाही में 60.8 था। यह कारोबारी उम्मीदों में व्यापक सुधार का संकेत है।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ‘‘इस सूचकांक में दिखाई दे रहा भरोसा वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित मजबूती को बताता है। मजबूत घरेलू मांग और ठोस वृहद आर्थिक संकेतकों के सहारे कारोबारी गतिविधियों में लगातार सुधार से यह धारणा मजबूत हुई है कि सरकार की अनुकूल नीतियां उत्पादन और नए ऑर्डर में तेज वृद्धि को समर्थन देंगी।’’

ये बातें सीआईआई के तिमाही व्यापार परिदृश्य सर्वेक्षण के 136वें दौर में सामने आई हैं। इसमें विभिन्न क्षेत्रों, राज्यों और विभिन्न आकार की 240 से अधिक कंपनियों ने हिस्सा लिया।

सर्वेक्षण ऐसे समय आया है जब अर्थव्यवस्था में मजबूती के संकेत दिख रहे हैं।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 6.9 प्रतिशत थी।

सीआईआई के अनुसार, सर्वेक्षण के नतीजे इस बात की पुष्टि करते हैं कि उम्मीद से बेहतर रहे जीडीपी आंकड़े महज सांख्यिकीय आंकड़े नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर आर्थिक गतिविधियों में आई वास्तविक तेजी का परिणाम हैं। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र 9.2 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सेवाओं की वृद्धि दर 10 प्रतिशत रही।

बनर्जी ने कहा, ‘‘उद्योग जगत की धारणा में बदलाव संयोग नहीं है। जब कारोबारी भरोसा, वृहद आर्थिक संकेतक और जमीनी स्तर की गतिविधियां एक साथ बेहतर होती हैं, तो यह अधिक व्यापक, टिकाऊ और स्थायी वृद्धि की ओर संकेत करता है।’’

कारोबारी भरोसा सूचकांक के दोनों घटकों में सुधार हुआ, लेकिन इसमें मुख्य योगदान भविष्य को लेकर उम्मीद सूचकांक (ईआई) में तेज वृद्धि का रहा। ईआई वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में बढ़कर 67.7 हो गया, जो पहली तिमाही में 60.6 था। वहीं मौजूदा स्थिति सूचकांक (सीएसआई) अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़कर 61.2 से 62.6 हो गया।

सीआईआई ने कहा कि दोनों सूचकांकों के बीच बढ़ता अंतर दर्शाता है कि उद्योग को आने वाली तिमाही में मौजूदा स्थिति की तुलना में कारोबारी परिस्थितियां काफी बेहतर रहने की उम्मीद है।

सर्वेक्षण में 61 प्रतिशत प्रतिभागियों ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में घरेलू मांग बढ़ने की उम्मीद जताई। इसके विपरीत केवल 9.6 प्रतिशत ने मांग में कमी आने की आशंका जताई।

इतना ही नहीं 20 प्रतिशत से अधिक मांग वृद्धि की उम्मीद करने वाली कंपनियों का हिस्सा भी बढ़कर दूसरी तिमाही में 16 प्रतिशत हो गया जो पहली तिमाही में 12.9 प्रतिशत था।

मजबूत मांग के अनुमान से उत्पादन क्षमता के बेहतर उपयोग की उम्मीद है।

सर्वेक्षण के अनुसार, 51.6 प्रतिशत से अधिक प्रतिभागियों को 2026 की दूसरी छमाही में अपनी क्षमता उपयोग 80 प्रतिशत से अधिक रहने की उम्मीद है, जबकि पहली छमाही में ऐसा मानने वाली कंपनियों का हिस्सा 36.6 प्रतिशत था। क्षमता का लगातार ऊंचा उपयोग आने वाली तिमाहियों में निजी क्षेत्र के नए निवेश को बढ़ावा दे सकता है।

हालांकि, कच्चे माल की बढ़ती लागत अब भी चिंता का विषय है, लेकिन लागत दबाव की तीव्रता कम होती दिख रही है। दूसरी तिमाही में लागत बढ़ने की उम्मीद करने वाली कंपनियों का हिस्सा घटकर 61.1 प्रतिशत रह गया, जबकि पहली तिमाही में यह करीब दो-तिहाई था।

यह आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के मुनाफे के लिए सकारात्मक संकेत है।

रोजगार के मोर्चे पर भी धारणा सकारात्मक रही। 53 प्रतिशत प्रतिभागियों ने दूसरी तिमाही में अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की उम्मीद जताई। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां बढ़ते उत्पादन और मजबूत मांग के लिए तैयारी कर रही हैं और मध्यम अवधि के कारोबारी माहौल को लेकर आश्वस्त हैं।

हालांकि, कंपनियां जोखिमों को लेकर सतर्क भी हैं। अगले छह महीनों में वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता को सबसे बड़ा जोखिम माना गया है। इसके बाद जिंसों की कीमतों में उतार-चढ़ाव प्रमुख चिंता है।

सीआईआई ने कहा कि ये चिंताएं लगातार नीतिगत समर्थन और वैश्विक घटनाक्रम पर करीबी नजर रखने की जरूरत को रेखांकित करती हैं।

बनर्जी ने कहा, ‘‘भारतीय उद्योग वर्ष की दूसरी छमाही में अधिक विश्वास के साथ प्रवेश कर रहा है। बाहरी जोखिमों पर लगातार ध्यान देने की जरूरत है, लेकिन बुनियादी आर्थिक गतिविधियां उत्साहजनक बनी हुई है।”

भाषा रमण अजय

अजय


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