(अदिति खन्ना)
लंदन, 15 जुलाई (भाषा) भारत और ब्रिटेन के उद्योग एवं कारोबारी संगठनों ने बुधवार से मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लागू होने का स्वागत किया। उनका कहना है कि शुल्क में व्यापक कटौती से दोनों देशों के बीच वस्तुओं व सेवाओं के द्विपक्षीय प्रवाह को गति और व्यापार को नई रफ्तार मिलेगी।
व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) पर पिछले वर्ष जुलाई में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके ब्रिटिश समकक्ष कीर स्टार्मर ने हस्ताक्षर किए थे।
इस समझौते से वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार मौजूदा लगभग 48 अरब पाउंड से कम से कम दोगुना होने का अनुमान है। साथ ही, दीर्घकाल में दोनों देशों के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में हर वर्ष करीब पांच अरब पाउंड की वृद्धि होगी।
सिटी ऑफ लंदन की लॉर्ड मेयर डेम सुसान लैंगली ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ यह समझौता हमारे कारोबारों के लिए व्यापार, निवेश और विस्तार को आसान बनाएगा तथा वित्तीय एवं पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र में नए अवसर पैदा करेगा।’’
भारत यात्रा का उल्लेख करते हुए ब्रिटेन की वित्तीय राजधानी की वैश्विक राजदूत ने कहा कि उन्होंने दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक में अवसरों की व्यापकता को करीब से देखा है। उन्होंने सीईटीए को दोनों देशों के लिए ‘‘ऐतिहासिक’’ करार दिया।
वैमानिकी से लेकर खाद्य, स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर वित्तीय सेवाओं तक, सीईटीए को भारत के अब तक के सबसे व्यापक व्यापार समझौतों में से एक बताया गया है। इससे वस्त्र, जूते-चप्पल और इंजीनियरिंग उत्पाद जैसे लाखों लोगों को रोजगार देने वाले उद्योगों को समर्थन मिलेगा।
यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूकेआईबीसी) के समूह मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) डॉ. किशोर जयरमण ने कहा, ‘‘ सीईटीए की शुभकामनाएं। लंबे समय से प्रतीक्षित यह समझौता ब्रिटेन और भारत जैसी दो महान अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार और अर्थव्यवस्था को नई गति देगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ उद्योग जगत लंबे समय से इस दिन का इंतजार कर रहा था। यह हमें भविष्य की विकास यात्रा पर सही दिशा देगा।’’
ग्रांट थॉर्नटन यूके के भागीदार एवं दक्षिण एशिया कारोबार समूह के प्रमुख अनुज चंदे ने कहा, ‘‘ दोनों देशों के लिए इसकी संभावनाएं बहुत बड़ी हैं। हर वर्ष 25 अरब पाउंड अतिरिक्त व्यापार का जो अनुमान लगाया जा रहा है, वह भी संभवतः वास्तविक क्षमता से कम है।’’
स्टैंडर्ड चार्टर्ड की समूह मुख्य परिचालन अधिकारी तनुज कपिलाश्रमी ने एफटीए को ‘‘दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण विकास गलियारों में से एक के लिए ऐतिहासिक कदम’’ बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘व्यापार शुल्क में कमी, बाजार तक बेहतर पहुंच और निवेशकों को अधिक निश्चितता मिलने से हर आकार के कारोबार के लिए निवेश और विस्तार के नए अवसर पैदा होंगे।’’
ब्रिटेन की संसद के एक विश्लेषण के अनुसार, भारतीय बाजार में कारोबार करने में कंपनियों को ‘‘काफी बाधाओं’’ का सामना करना पड़ता था। वर्ष 2024 में औसत आयात शुल्क 12 प्रतिशत था जबकि पेय पदार्थ और तंबाकू पर 150 प्रतिशत, वस्त्रों पर 255 प्रतिशत तथा परिवहन उपकरणों पर 125 प्रतिशत शुल्क लगता था।
भारत-ब्रिटेन सीईटीए में 30 अध्याय हैं जिनमें वस्तुओं एवं सेवाओं का व्यापार, स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (एसपीएस) प्रावधान, व्यापार में तकनीकी बाधाएं, डिजिटल व्यापार, बौद्धिक संपदा और सरकारी खरीद जैसे विषय शामिल हैं।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले महीने लंदन यात्रा के दौरान बड़े कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ सीईटीए के पक्ष में माहौल बनाने के प्रयासों के दौरान कहा था कि इस समझौते के लागू होने से व्यापारिक अवसरों की बाढ़ आ जाएगी।
भाषा निहारिका मनीषा
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