संस्थान अति उत्साही न हों, एआई का इस्तेमाल उसके विश्वसनीय होने पर ही करें: सरकारी अधिकारी

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संस्थान अति उत्साही न हों, एआई का इस्तेमाल उसके विश्वसनीय होने पर ही करें: सरकारी अधिकारी

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  • Publish Date - February 20, 2026 / 12:21 PM IST,
    Updated On - February 20, 2026 / 12:21 PM IST

नयी दिल्ली, 20 फरवरी (भाषा) संस्थानों को कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित समाधानों के इस्तेमाल को लेकर तब तक अत्यधिक उत्साह नहीं दिखाना चाहिए, जब तक उनका पूर्ण परीक्षण न हो और वे विश्वसनीय न हों। एक सरकारी अधिकारी ने शुक्रवार को यह बात की।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के ‘डेटा इन्फॉर्मेटिक्स एंड इनोवेशन’ प्रभाग के उपमहानिदेशक रोहित भारद्वाज ने यहां ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में ‘एआई-समक्ष डेटा : नवाचार के लिए साझा अवसंरचना’ विषयक सत्र के दौरान कहा कि सरकारी विभागों को प्रासंगिक आंकड़ों को कंप्यूटर द्वारा पढ़े जा सकने योग्य (मशीन-रीडेबल) प्रारूप में तैयार कर उन्हें एआई-सक्षम (एआई-रेडी) बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “ ‘कॉन्टेक्स्ट फाइल’ होनी चाहिए, ‘सिमैंटिक्स’ होनी चाहिए और ‘मेटाडेटा’ होना चाहिए।’’

‘कॉन्टेक्स्ट फाइल’, वह फाइल है जिसमें किसी जानकारी या कार्य को सही संदर्भ में समझने के लिए आवश्यक पृष्ठभूमि विवरण होता है। ‘सिमैंटिक्स’, शब्दों या डेटा के वास्तविक अर्थ और उनके सही संदर्भ को समझने की प्रक्रिया है। ‘मेटाडेटा’, डेटा के बारे में दी गई अतिरिक्त जानकारी, जैसे उसकी तारीख, स्रोत या संरचना को कहते हैं।

अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि सूचनाओं को संरचित प्रारूप में संग्रहित किया जाए ताकि वे एआई-सक्षम बन सकें।

एआई समाधान को उपयोग में लाने से पहले उसके परीक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए भारद्वाज ने कनाडा के एक विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की एक रिपोर्ट का हवाला दिया।

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट से पता चलता है कि समान ‘प्रॉम्प्ट’ दिए जाने पर भी एआई किसी विशेष डेटा सेट का कई तरीकों से विश्लेषण कर सकता है।

भारद्वाज ने कहा, “ मैं केवल यह कहना चाहता हूं कि जिन चीजों का अभी परीक्षण नहीं हुआ है, उन्हें लेकर हमें अत्यधिक उत्साहित नहीं होना चाहिए। ’’

उन्होंने कहा कि एआई अपनाएं लेकिन यह विश्वसनीय होना चाहिए।

अधिकारी ने सुझाव दिया कि मंत्रालयों या सरकारी विभागों के पास डेटा का एक सूची-पत्र (कैटलॉग) होना चाहिए। सभी फाइल ‘पीडीएफ’ प्रारूप में नहीं बल्कि ‘मशीन-रीडेबल’ होनी चाहिए।

इसी मौके पर गूगल के प्रेम रामास्वामी ने कहा कि उनकी कंपनी वैश्विक स्तर पर अनेक डेटा सेट को एक साझा ‘नॉलेज ग्राफ’ में लाने और उसके ऊपर डेटा सर्च इंजन स्थापित करने का प्रयास करती है, ताकि डेटा तक शीघ्र पहुंच संभव हो सके।

उन्होंने आगाह किया कि डेटा का एक ही स्रोत पर केंद्रीकृत होना जोखिमपूर्ण हो सकता है। इसके बजाय, डेटा प्रत्येक संगठन के पास स्थानीय स्तर पर सुरक्षित एवं संचालित होना चाहिए जिससे वह व्यापारिक इकाइयों के लिए सुलभ और किफायती बने।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा