एआई पर नीति, आर्थिक प्रभाव को दिशा देने के लिए अंतर-मंत्रालयी निकाय का गठन
एआई पर नीति, आर्थिक प्रभाव को दिशा देने के लिए अंतर-मंत्रालयी निकाय का गठन
नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) केंद्र सरकार ने देश की कृत्रिम मेधा (एआई) नीति और उसके आर्थिक प्रभावों को दिशा देने के लिए उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी निकाय ‘एआई गवर्नेंस एंड इकॉनमिक ग्रुप’ (एआईजीईजी) का गठन किया है। बृहस्पतिवार को एक बयान में यह जानकारी दी गई।
आधिकारिक बयान के मुताबिक, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव इस अंतर-मंत्रालयी निकाय की अध्यक्षता करेंगे।
एआईजीईजी विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और क्षेत्रीय नियामकों के बीच नीतिगत समन्वय करेगा और एआई से जुड़े बहु-क्षेत्रीय मुद्दों की निगरानी करेगा। राज्यमंत्री जितिन प्रसाद इस समूह के उपाध्यक्ष होंगे।
सरकार ने कहा, ‘‘एआईजीईजी देश के एआई गवर्नेंस ढांचे में शीर्ष निकाय के रूप में काम करेगा। इसे एक ‘प्रौद्योगिकी एवं नीति विशेषज्ञ समिति’ (टीपीईसी) का सहयोग मिलेगा, जो वैश्विक रुझानों, नई प्रौद्योगिकी, जोखिमों और नियमों पर विशेषज्ञ सलाह देगी।’’
यह निकाय एआई के रोजगार पर प्रभाव का आकलन पहले से करेगा और उसके अनुसार रणनीतियां तैयार करेगा। इसमें अलग-अलग कौशल, अनौपचारिक रोजगार और क्षेत्रीय असमानताओं को ध्यान में रखा जाएगा।
यह निकाय उद्योग और अन्य पक्षों के साथ मिलकर अगले दशक के लिए एआई लागू करने का खाका तैयार करेगा। इसमें यह भी आकलन होगा कि किन नौकरियों पर असर पड़ेगा, किन क्षेत्रों में प्रभाव ज्यादा होगा और कितनी हद तक काम मशीनों द्वारा या मानव एवं मशीनी सहयोग से बदलेगा।
एआईजीईजी एआई के इस्तेमाल वाले मामलों को ‘डिप्लॉय’, ‘पायलट’ और ‘डिफर’ जैसी श्रेणियों में बांटेगा। यह वर्गीकरण डेटा उपलब्धता, कौशल, कानूनी ढांचे और श्रम समायोजन क्षमता के आधार पर होगा।
इसके अलावा, यह निकाय कंपनियों की जवाबदेही तय करने, एआई के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने, संभावित जोखिमों एवं कानूनी खामियों का अध्ययन करने और जरूरत पड़ने पर कानूनों में संशोधन की सिफारिश करने का काम भी करेगा।
सरकार ने कहा कि इस समूह का गठन एआई गवर्नेंस दिशानिर्देशों और आर्थिक समीक्षा में की गई सिफारिशों के अनुरूप किया गया है, जिसमें पूरे सरकार के स्तर पर समन्वित रणनीति की जरूरत बताई गई थी।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय

Facebook


