ट्रंप की आक्रामक व्यापार रणनीति के तहत आईपीएफएफ की प्रासंगिकता कम हो रही है: जीटीआरआई

ट्रंप की आक्रामक व्यापार रणनीति के तहत आईपीएफएफ की प्रासंगिकता कम हो रही है: जीटीआरआई

ट्रंप की आक्रामक व्यापार रणनीति के तहत आईपीएफएफ की प्रासंगिकता कम हो रही है: जीटीआरआई
Modified Date: May 5, 2026 / 01:04 pm IST
Published Date: May 5, 2026 1:04 pm IST

नयी दिल्ली, पांच मई (भाषा) ‘इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क फॉर प्रॉस्पेरिटी’ (आईपीईएफ) की प्रासंगिकता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापार रणनीति के तहत कम हो रही है। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने मंगलवार को यह बात कही।

आईपीईएफ भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सहित 14 देशों का समूह है। इसकी शुरुआत 23 मई 2023 को जापान की राजधानी तोक्यो में अमेरिका और अन्य हिंद-प्रशांत साझेदार देशों द्वारा संयुक्त रूप से की गई थी। इसके 14 साझेदार देश 40 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) और 28 प्रतिशत वैश्विक माल एवं सेवा व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।

आईपीईएफ को चार स्तंभों पर आधारित बहुपक्षीय सहयोग ढांचे के रूप में संरचित किया गया है। पहला स्तंभ व्यापार है जिसका उद्देश्य डिजिटल व्यापार, श्रम, पर्यावरण एवं नियामकीय प्रथाओं पर नियम विकसित करना है। दूसरा आपूर्ति शृंखला जो लचीलापन, विविधीकरण और संकट प्रतिक्रिया पर केंद्रित है।

वहीं स्वच्छ अर्थव्यवस्था (तीसरा स्तंभ) स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु प्रौद्योगिकियों और टिकाऊ अवसंरचना पर सहयोग को बढ़ावा देती है और निष्पक्ष अर्थव्यवस्था (चौथ स्तंभ) भ्रष्टाचार-रोधी उपायों, कर पारदर्शिता और शासन से संबंधित है।

आपूर्ति शृंखला लचीलापन समझौते पर नवंबर 2023 में हस्ताक्षर किए गए और यह 24 फरवरी 2024 से प्रभावी हुआ जबकि स्वच्छ अर्थव्यवस्था, निष्पक्ष अर्थव्यवस्था एवं व्यापक समझौतों पर सितंबर 2024 में हस्ताक्षर किए गए और वे अक्टूबर 2024 से लागू हुए।

भारत ने चार में से तीन स्तंभों आपूर्ति शृंखला, स्वच्छ अर्थव्यवस्था और निष्पक्ष अर्थव्यवस्था में भाग लिया है, जबकि डिजिटल व्यापार एवं नियामकीय प्रतिबद्धताओं से जुड़ी चिंताओं के कारण वह व्यापार स्तंभ से बाहर रहा है।

‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव’ (जीटीआरआई) ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिकी व्यापार माहौल में आईपीईएफ की ‘‘ निकट अवधि में व्यावहारिक भूमिका बेहद कम’’ है।

इसमें कहा गया कि ट्रंप का दृष्टिकोण उच्च शुल्क, धारा 301 के तहत जांचों का आक्रामक उपयोग और त्वरित द्विपक्षीय समझौतों पर आधारित है जो आईपीईएफ की सहयोगात्मक एवं गैर-बाध्यकारी संरचना के विपरीत है।

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि ट्रंप की आक्रामक व्यापार रणनीति के तहत आईपीईएफ अपनी प्रासंगिकता खो रहा है। साथ ही आपूर्ति शृंखलाओं को चीन से हटाने की महत्वाकांक्षा संरचनात्मक सीमाओं का सामना कर रही है।

उन्होंने साथ ही कहा कि कंपनियों के ‘चीन+1’ रणनीति अपनाने से चीन से पूरी तरह बाहर निकलने के बजाय जोखिम का विविधीकरण हो रहा है।

श्रीवास्तव ने कहा कि आईपीईएफ हालांकि भारत को एक वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है लेकिन वास्तविक लाभ आईपीईएफ पर कम और भारत में घरेलू सुधार करने, बुनियादी ढांचे में सुधार करने और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने की क्षमता पर अधिक निर्भर करेगा।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


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