ईरान संकट: भारत पर कीमतों और व्यापक आर्थिक असर की आशंका, तेल आपूर्ति पर कोई बड़ा खतरा नहीं

ईरान संकट: भारत पर कीमतों और व्यापक आर्थिक असर की आशंका, तेल आपूर्ति पर कोई बड़ा खतरा नहीं

ईरान संकट: भारत पर कीमतों और व्यापक आर्थिक असर की आशंका, तेल आपूर्ति पर कोई बड़ा खतरा नहीं
Modified Date: March 1, 2026 / 04:17 pm IST
Published Date: March 1, 2026 4:17 pm IST

नयी दिल्ली, एक मार्च (भाषा) ईरान में गहराते संकट के कारण भारत को कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और व्यापक आर्थिक प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है। विश्लेषकों ने यह राय जताई। हालांकि, देश की तेल आपूर्ति श्रृंखला को अभी तक किसी संरचनात्मक असुरक्षा का सामना नहीं करना पड़ा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव ने ब्रेंट क्रूड की कीमतों को 73 डॉलर प्रति बैरल के सात महीने के उच्चस्तर तक पहुंचा दिया है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ गया है, जिससे मुद्रास्फीति और चालू खाते के घाटे (सीएडी) पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, निकट भविष्य में तेल आपूर्ति बाधित होने की संभावना कम है।

केपलर के शीर्ष शोध विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा, ”मौजूदा स्थिति में शुरुआती प्रभाव मात्रा के बजाय कीमतों पर आधारित होने की संभावना है। भू-राजनीतिक जोखिम के कारण ब्रेंट की कीमतों के साथ ही माल ढुलाई दरों और युद्ध-जोखिम बीमा लागत में भी वृद्धि होगी।”

रितोलिया के अनुसार, अगर पश्चिम एशिया से आपूर्ति कम होती है, तो भारतीय रिफाइनरियां फिर से रूसी तेल की ओर रुख कर सकती हैं। समुद्र में मौजूद रूसी तेल का भंडार भारत के लिए एक ‘बफर’ के रूप में काम करेगा।

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति का असर भारत की अर्थव्यवस्था, ईंधन की कीमतों, महंगाई और प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले धन पर पड़ेगा।

भाषा अजय पाण्डेय

अजय


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