चंडीगढ़, एक मार्च (भाषा) ईरान पर अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के बाद हरियाणा के चावल निर्यातकों को ईरान और अफगानिस्तान जाने वाली खेप में व्यवधान और भुगतान में देरी का डर सता रहा है।
राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन की राज्य इकाई के अध्यक्ष सुशील कुमार जैन ने रविवार को कहा, ‘‘व्यापार पर संघर्ष का कुछ असर पहले ही शुरू हो चुका है।’’
ईरान के सबसे बड़े बंदरगाह- बंदर अब्बास के रास्ते ईरान या अफगानिस्तान जाने वाली खेप रुक गई है। जैन ने पीटीआई-भाषा को बताया, ”स्थिति सुधरने तक ये खेप फंसी रहेगी, जिससे बाजार प्रभावित होगा। भुगतान में भी देरी हो सकती है।” हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रभाव का सटीक आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि संघर्ष कितने समय तक चलता है।
बासमती निर्यात के बारे में जैन ने बताया कि भारत के कुल वार्षिक निर्यात में हरियाणा का योगदान लगभग 35 प्रतिशत है। करनाल के एक चावल मिल मालिक नीरज कुमार ने कहा, ‘‘कल संघर्ष शुरू होने के बाद से अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। महज एक दिन में व्यापार प्रभावित हुआ है, जिससे बासमती की दरों में लगभग 4-5 रुपये प्रति किलोग्राम (400-500 रुपये प्रति क्विंटल) की गिरावट आई है।’’
उन्होंने पिछले साल जून के ईरान-इजरायल संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि तब भी व्यापार प्रभावित हुआ था। उनके अनुसार, ‘‘ईरान बासमती का हमारा सबसे बड़ा खरीदार है, जबकि इसका निर्यात संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ओमान, यमन और इराक जैसे अन्य देशों में भी किया जाता है। मार्च का निर्यात प्रभावित होगा।’’
भाषा पाण्डेय अजय
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