जेएएल अधिग्रहण: एनसीएलएटी का अदाणी की बोली पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार

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जेएएल अधिग्रहण: एनसीएलएटी का अदाणी की बोली पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार

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  • Publish Date - March 24, 2026 / 08:18 PM IST,
    Updated On - March 24, 2026 / 08:18 PM IST

नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने मंगलवार को जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के अधिग्रहण के लिए अदाणी समूह की 14,535 करोड़ रुपये की बोली पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। वेदांता समूह ने एनसीएलटी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अदाणी की बोली को मंजूरी दी गई थी।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने जेएएल के ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) से एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 अप्रैल की तारीख तय की गई है।

पीठ ने कहा, ‘मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर जल्द सुनवाई की जरूरत है।’

अदालत ने सभी पक्षों को निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई से पहले अपनी दलीलों का संक्षिप्त नोट जमा करें, जो पांच पन्नों से अधिक न हो।

अपीलीय न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि फिलहाल समाधान योजना पर काम जारी रहेगा, लेकिन यह वेदांता समूह द्वारा दायर अपीलों के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।

सुनवाई के दौरान वेदांता के वकील ने दलील दी कि उन्हें कर्जदाताओं की समिति ने सबसे बड़ा बोलीदाता घोषित किया था। वेदांता की बोली 16,726 करोड़ रुपये की थी, जबकि अदाणी एंटरप्राइजेज की बोली 14,535 करोड़ रुपये थी।

वेदांता का तर्क है कि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) का मुख्य मकसद कर्ज में डूबी कंपनी की संपत्तियों की ‘ज्यादा से ज्यादा कीमत’ वसूलना है, लेकिन बैंकों ने कम बोली (अदाणी की बोली) को चुनकर इस नियम की अनदेखी की है।

ऋणदाताओं ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत थी। बैंकों का तर्क है कि केवल ऊंची बोली देना ही जीत की गारंटी नहीं है।

अदाणी की योजना को इसलिए पसंद किया गया क्योंकि वे 6,000 करोड़ रुपये नकद और दो साल के भीतर भुगतान की पेशकश कर रहे थे, जबकि वेदांता का भुगतान समय पांच साल तक लंबा था।

सोमवार को एनसीएलएटी ने वेदांता को निर्देश दिया था कि वह इस मामले में अदाणी एंटरप्राइजेज को भी पक्षकार बनाए, क्योंकि उनके पक्ष को सुने बिना एकतरफा आदेश पारित नहीं किया जा सकता।

अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाला वेदांता समूह शुरू से ही जेएएल की दौड़ में शामिल था, लेकिन पिछले साल नवंबर में कर्जदाताओं ने 89 प्रतिशत वोटों के साथ अदाणी की योजना को चुना था।

इलाहाबाद एनसीएलटी ने 17 मार्च को अदाणी की बोली को आधिकारिक मंजूरी दी थी, जिसे अब वेदांता ने एनसीएलएटी में चुनौती दी है।

जयप्रकाश एसोसिएट्स के पास रियल एस्टेट, सीमेंट, होटल और बिजली क्षेत्र में बड़ी संपत्तियां हैं। इनमें ग्रेटर नोएडा में ‘जेएपी ग्रीन्स’, नोएडा में ‘विशटाउन’ और जेवर हवाई अड्डे के पास ‘इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।

कंपनी पर कुल 57,185 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है, जिसके चलते जून, 2024 में इसे दिवाला प्रक्रिया में डाला गया था।

भाषा सुमित अजय

अजय