जिंदल स्टेनलेस ‘कॉइन ब्लैंक’ की विनिर्माण क्षमता 20 प्रतिशत बढ़ाएगी

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जिंदल स्टेनलेस ‘कॉइन ब्लैंक’ की विनिर्माण क्षमता 20 प्रतिशत बढ़ाएगी

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  • Publish Date - August 30, 2026 / 11:14 AM IST,
    Updated On - August 30, 2026 / 11:14 AM IST

हिसार (हरियाणा), 30 अगस्त (भाषा) जिंदल स्टेनलेस ने सिक्कों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले ‘कॉइन ब्लैंक’ की वार्षिक उत्पादन क्षमता 20 प्रतिशत बढ़ाने का फैसला किया है। कंपनी अपनी क्षमता को मौजूदा 10,000 टन से बढ़ाकर 12,000 टन सालाना करेगी। कंपनी का मानना है कि दुनिया के विभिन्न देशों में कागज वाली मुद्रा के बजाय सिक्कों और अन्य धातु आधारित मुद्रा की मांग बढ़ रही है।

जिंदल स्टेनलेस के हिसार संयंत्र के इकाई प्रमुख विजय बिंदलिश ने संवाददाताओं को बताया कि कंपनी भारतीय टकसाल के साथ-साथ कई विदेशी टकसाल के लिए भी कॉइन ब्लैंक तैयार करती है। उन्होंने कहा कि कंपनी भारत के अलावा फ्रांस, फिनलैंड, पोलैंड, नीदरलैंड, ब्रिटेन की रॉयल मिंट, मलेशिया और स्लोवाकिया की टकसाल को भी कॉइन ब्लैंक की आपूर्ति करती है।

कॉइन ब्लैंक सिक्के का शुरुआती धातु वाला रूप होता है। बाद में टकसाल में इसी ब्लैंक पर विशेष मशीन से डिजाइन, अंक और अन्य निशान उकेरकर इसे प्रचलन योग्य सिक्के का रूप दिया जाता है।

बिंदलिश ने बताया कि अलग-अलग देशों की टकसाल की जरूरत के अनुसार, कॉइन ब्लैंक तैयार किए जाते हैं। इनके आकार, व्यास, मोटाई, आकृति और धातु मिश्रण (अलॉय) की उन टकसाल द्वारा तय की जाती हैं।

कंपनी के विशेष उत्पाद प्रभाग (एसपीडी) में उच्च सुरक्षा व्यवस्था के बीच कॉइन ब्लैंक का उत्पादन किया जाता है। इसी प्रभाग में रेजर ब्लेड और प्रिसीजन स्ट्रिप जैसे उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद भी बनाए जाते हैं।

कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, जिंदल स्टेनलेस दुनिया के कॉइन ब्लैंक बाजार में एक प्रमुख कंपनी है और आने वाले समय में नए देशों से ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। कंपनी उन मूल्यवर्गों के लिए भी ऑर्डर हासिल करना चाहती है, जिनके कॉइन ब्लैंक का उत्पादन फिलहाल नहीं किया जा रहा है।

एसपीडी के प्रमुख सौरभ कुमार ने बताया कि यह प्रभाग हर साल करीब 19,500 टन रेजर ब्लेड का उत्पादन करता है। हाल में इसकी क्षमता 13,200 टन से बढ़ाकर 19,500 टन की गई है। कंपनी भारत के अलावा पोलैंड, वियतनाम, चीन और दक्षिण कोरिया सहित कई देशों में इनकी आपूर्ति करती है।

हिसार स्थित जिंदल स्टेनलेस का संयंत्र आठ लाख टन वार्षिक क्षमता वाला है और हरियाणा के पुराने औद्योगिक प्रतिष्ठानों में शामिल है। यहां 1970 में कार्बन स्टील का उत्पादन शुरू हुआ था और 1978 में आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से स्टेनलेस स्टील उत्पादन की शुरुआत की गई।

कंपनी के कोल्ड रोलिंग खंड के प्रमुख सुशील जैन ने बताया कि संयंत्र में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) प्रणाली लागू है। इसके तहत इस्तेमाल किए गए पानी और एसिड को उपचारित कर दोबारा संयंत्र में उपयोग किया जाता है, जिससे औद्योगिक अपशिष्ट जल का बाहरी निस्तारण नहीं होता।

कंपनी इस वर्ष संयंत्र में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी 70 से बढ़ाकर 80 प्रतिशत करने की दिशा में भी काम कर रही है।

भाषा अजय अजय

अजय