(Janmashtami 2026/ Image Credit: AI-generated)
Janmashtami 2026: जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व (Janmashtami 2026) को भक्त बड़ी श्रद्धा के साथ मनाते हैं। इस दिन व्रत रखने के साथ बाल गोपाल का श्रृंगार किया जाता है और उन्हें पसंदीदा चीजों का भोग लगाया जाता है। कई घरों और मंदिरों में श्रीकृष्ण को छप्पन भोग अर्पित करने की परंपरा भी है। धार्मिक मान्यताओं में भोग लगाते समय शुद्धता और कुछ खास नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना गया है।
छप्पन भोग से जुड़ी मान्यता गोवर्धन पर्वत की कथा से संबंधित है। कहा जाता है कि माता यशोदा बाल कृष्ण को दिन में आठ पहर भोजन कराती थीं। जब श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत उठाया, तब उन्होंने भोजन नहीं किया। इसके बाद ब्रजवासियों ने सात दिन और आठ पहर के हिसाब से 56 तरह के व्यंजन बनाकर कान्हा को अर्पित किए। तभी से छप्पन भोग की परंपरा प्रचलित मानी जाती है।
इस साल 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami 2026) शुक्रवार 4 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं और निशीथ काल में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिरों और घरों में इस दौरान बाल गोपाल को सजाया जाता है।
छप्पन भोग के लिए बनाए जाने वाले व्यंजन सात्विक और साफ-सुथरे होने चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भोजन में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। भोग में तुलसी दल रखना भी जरूरी माना जाता है। भगवान को भोग अर्पित करने के लिए तांबे, पीतल, चांदी, सोने, लकड़ी या मिट्टी के पात्र इस्तेमाल करने की परंपरा बताई गई है। प्लास्टिक या स्टील के बर्तनों का उपयोग नहीं करना चाहिए।
भोग के साथ भगवान के सामने जल से भरा छोटा पात्र रखना चाहिए। भोग लगाने के बाद घंटी या ताली बजाकर भगवान (Krishna Janmashtami 2026) का स्मरण करें और कुछ समय के लिए पूजा स्थल से हट जाएं या पर्दा कर दें। करीब 5 से 10 मिनट बाद भोग को वहां से हटाकर प्रसाद के रूप में बांट देना चाहिए। मान्यता है कि भोग को लंबे समय तक पूजा स्थल पर छोड़ना उचित नहीं माना जाता।