कर्नाटक ने 2030 तक बिजली क्षमता 66 गीगावाट करने का रखा लक्ष्य

कर्नाटक ने 2030 तक बिजली क्षमता 66 गीगावाट करने का रखा लक्ष्य

कर्नाटक ने 2030 तक बिजली क्षमता 66 गीगावाट करने का रखा लक्ष्य
Modified Date: September 3, 2026 / 04:59 pm IST
Published Date: September 3, 2026 4:59 pm IST

बेंगलुरु, तीन सितंबर (भाषा) कर्नाटक ने 2030 तक अपनी स्थापित बिजली क्षमता मौजूदा 39 गीगावाट से अधिक से बढ़ाकर 66 गीगावाट करने का 10 साल की रूपरेखा तैयार की है। ऊर्जा विभाग ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव गौरव गुप्ता ने कहा कि अगले दशक में बिजली क्षमता का विस्तार मुख्य रूप से स्वच्छ ऊर्जा पर केंद्रित रहेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य में फिलहाल 39 गीगावाट से अधिक की स्थापित बिजली क्षमता है, जिसमें करीब दो-तिहाई हिस्सेदारी स्वच्छ जलविद्युत और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की है।

ऊर्जा विभाग के अनुसार, औद्योगिक विस्तार, इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल और बेंगलुरु, मैसूरु तथा मंगलुरु में बड़े डेटा केंद्रों के कारण अगले दशक में बिजली की मांग दोगुनी होने की उम्मीद है।

गुप्ता ने कहा कि राज्य अनुमानित मांग को पूरा करने के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) और कर्नाटक विद्युत नियामक आयोग (केईआरसी) से मंजूर संसाधन पर्याप्तता योजना लागू कर रहा है। साथ ही बिजली ग्रिड के बुनियादी ढांचे और ऊर्जा भंडारण क्षमता को मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि 2,000 मेगावाट की ‘शरावती पंप्ड स्टोरेज’ परियोजना पर काम आगे बढ़ रहा है और महत्वपूर्ण कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (केपीटीसीएल) उपकेंद्रों पर बड़े पैमाने पर बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली लगाई जा रही है।

भाषा योगेश

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