राजस्व घाटा अनुदान खत्म होने से राज्यों की वित्तीय स्थिति पर असर नहीं पड़ेगा: व्यय सचिव
राजस्व घाटा अनुदान खत्म होने से राज्यों की वित्तीय स्थिति पर असर नहीं पड़ेगा: व्यय सचिव
नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) व्यय सचिव वी वुअलनाम ने कहा है कि 16वें वित्त आयोग द्वारा हस्तांतरण के बाद दिए जाने वाले राजस्व घाटा अनुदान को खत्म करने की सिफारिश का राज्यों की वित्तीय स्थिति पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने बजट के बाद पीटीआई-भाषा को दिए एक साक्षात्कार में सोमवार को बताया कि केवल कुछ ही राज्यों को यह अनुदान मिल रहा था और वित्त वर्ष 2025-26 में इसकी कुल राशि घटकर मात्र 13,000 करोड़ रुपये रह गई है।
उन्होंने आगे कहा कि राजस्व घाटा अनुदान एक क्रमिक रूप से कम होने वाला अनुदान था और 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार इसे 2025-26 तक खत्म होना ही था।
अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता वाले 16वें वित्त आयोग ने एक अप्रैल, 2026 से शुरू होने वाले पांच वर्षों के लिए केंद्रीय करों में राज्यों की 41 प्रतिशत हिस्सेदारी का सुझाव दिया है। आयोग ने स्थानीय निकायों के अनुदान को दोगुना करने का सुझाव दिया है, जबकि राज्यों के लिए राजस्व घाटा अनुदान को खत्म कर दिया है।
व्यय सचिव ने विश्वास जताते हुए कहा, ‘‘मुझे भरोसा है कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को समग्र रूप से लागू करने से राज्यों की वित्तीय स्थिति काफी स्थिर और मजबूत हो जाएगी।’’
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को अपने राजकोषीय लक्ष्यों और ऋण प्रबंधन पथ का पालन सुनिश्चित करने के लिए बहुत सावधानी बरतनी होगी, क्योंकि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद राज्यों को भारी मात्रा में धनराशि दी जाएगी।
वुअलनाम ने कहा कि वित्त आयोग के हस्तांतरण सूत्र के अनुसार केंद्रीय कर संग्रह में राज्यों का हिस्सा लगभग 14 लाख करोड़ रुपये होगा। उन्होंने कहा कि अनुदानों के साथ-साथ केंद्र प्रायोजित योजनाओं तथा केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं जैसे अन्य मदों को मिलाकर सरकार से राज्यों को जाने वाली कुल राशि 25 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगी।
वुअलनाम ने कहा, ‘‘सरकार ने सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है और हमें बहुत सावधानी से आगे बढ़ना होगा ताकि हमारे राजकोषीय लक्ष्य, हमारी वृद्धि यात्रा और अन्य सभी लक्ष्यों का पालन किया जा सके।’’
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को अपने बजट भाषण में अगले वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया, जो मार्च 2026 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए 4.4 प्रतिशत है।
बजट अनुमान (बीई) 2026-27 में ऋण-जीडीपी अनुपात 55.6 प्रतिशत आंका गया है जबकि संशोधित अनुमान (आरई) 2025-26 में यह 56.1 प्रतिशत था।
भाषा अजय पाण्डेय
अजय

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