पश्चिम एशिया युद्ध का वाहन उद्योग पर पड़ सकता है प्रतिकूल असर: सियाम
पश्चिम एशिया युद्ध का वाहन उद्योग पर पड़ सकता है प्रतिकूल असर: सियाम
नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (भाषा) वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम के अध्यक्ष शैलेश चंद्रा ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का भारतीय मोटर वाहन उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और यह क्षेत्र की मांग को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर निकट अवधि में चुनौतियां खड़ी कर सकता है।
चंद्रा ने पत्रकारों से कहा कि मोटर वाहन उद्योग ने वित्त वर्ष 2025-26 को मजबूत स्थिति से समाप्त किया, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से उत्पन्न घटनाक्रम कुछ जोखिम पैदा करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न हालिया अनिश्चितताओं पर करीबी नजर रखने की जरूरत है। बदलती भू-राजनीतिक स्थिति का मोटर वाहन उत्पादन, कच्चे माल एवं जिंस कीमतों, ईंधन कीमतों तथा मालभाड़ा दरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है जिससे उद्योग के सामने निकट अवधि की चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं और मांग पर भी अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।’’
घरेलू मोटर वाहन उद्योग की मौजूदा स्थिति पर जानकारी साझा करते हुए चंद्रा ने कहा, ‘‘ आपूर्ति में व्यवधान के कारण प्रोपेन और एथिलीन की कमी हो गई है, जो ‘पेंट शॉप’ और ‘हीट ट्रीटमेंट’ प्रक्रियाओं जैसे विनिर्माण कार्यों के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है।
उन्होंने कहा, ‘‘ कुछ पेट्रोरसासन और अन्य प्रमुख जिंस में कमी तथा लागत वृद्धि के कारण दबाव उभर रहे हैं।’’
सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के अध्यक्ष ने बताया कि वैश्विक लॉजिस्टिक्स स्थितियां भी अधिक अस्थिर हो गई हैं। मार्ग परिवर्तन से आवाजाही का समय बढ़ने के कारण शिपिंग लागत बढ़ रही है।
चंद्रा ने हालांकि स्पष्ट किया कि फिलहाल उत्पादन में कोई व्यवधान नहीं आया है, हालांकि स्थिति ‘‘संवेदनशील’’ बनी हुई है। कलपुर्जों की आपूर्ति को लेकर जो स्पष्टता पहले हर तीसरे दिन मिलती थी उसमें अब कुछ देरी हो रही है।
उन्होंने साथ ही कहा, ‘‘ अगर यह स्थिति लंबी खिंचती है और और खराब होती है, तो हम अपरिहार्य परिस्थितियों का सामना करेंगे…’’
लागत वृद्धि एवं संभावित वाहन मूल्य वृद्धि पर चंद्रा ने कहा, ‘‘ संभावना है कि लागत बढ़ने के साथ वाहनों की कीमतों में भी वृद्धि देखने को मिल सकती है। ओईएम (मूल उपकरण निर्माता) किस हद तक जिंस कीमतों को वहन कर पाएंगे और कीमतें कितनी बढ़ेंगी, यह अगले चार से पांच सप्ताह में स्पष्ट होगा।’’
उन्होंने कहा कि यदि ईंधन कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है और पश्चिम एशिया संकट लंबा चलता है, तो मांग पर असर पड़ सकता है।
चंद्रा ने यह भी कहा कि एलपीजी पर निर्भर कई कंपनियां अब पीएनजी अपना रही हैं और इन गैस के अधिक कुशल उपयोग के तरीके भी तलाश रही हैं।
उन्होंने कहा कि कहा कि यदि ईंधन कीमतों में वृद्धि होती है तो इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
भाषा निहारिका अजय
अजय

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