खाद्य तेल तिलहन में मिला-जुला रुख बरकरार

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खाद्य तेल तिलहन में मिला-जुला रुख बरकरार

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  • Publish Date - June 23, 2023 / 08:50 PM IST,
    Updated On - June 23, 2023 / 08:50 PM IST

नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) सस्ते आयातित खाद्यतेलों के कारण शुक्रवार को दिल्ली बाजार में खाद्यतेल तिलहन में मिला जुला रुख रहा। हालांकि सस्ते आयातित खाद्यतेलों की मंडियों में भरमार ने देशी तिलहन किसानों और पेराई मिलों के सामने संकट बना रखा है।

तेल तिलहन कारोबार के जानकार सूत्रों ने बताया कि तेल संगठनों और सरकार के प्रयासों के बाद सबसे अधिक खाद्यतेल बिक्री करने वाले ब्रांडों ने सूरजमुखी, सोयाबीन जैसे खाद्यतेलों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में पर्याप्त कटौती की है और अब जाकर भाव सामान्य हुए हैं।

सूत्रों ने कहा कि आयातित तेलों की भरमार स्थानीय तेल तिलहन बाजार को उठने नहीं देगा। मौजूदा समय में सोयाबीन तेल आयात करने में लगभग सात रुपये किलो का नुकसान है। सोयाबीन तेल आयात करने पर इसका भाव लगभग 87 रुपये लीटर बैठता है और बंदरगाह पर इसका थोक भाव 80.50 रुपये लीटर है। बाजार उठने न देने का मुख्य कारण सूरजमुखी तेल है जिसका आयात का भाव है 71 रुपये लीटर।

उन्होंने कहा कि सस्ते आयातित तेलों को नियंत्रित करना बेहद आवश्यक है क्योंकि इससे देशी तेल तिलहन खपेंगे नहीं। इसका असर तात्कालिक न होकर दीर्घकालिक हो सकता है और तिलहन खेती में कमी आ सकती है और किसान लाभकारी फसलों की ओर अपना रुख कर सकते हैं।

सूत्रों ने कहा कि जिस तरह पिछले साल उत्तर प्रदेश में निविदा मंगाकर राशन की दुकानों से खाद्यतेल बंटवाकर महंगाई पर लगाम लगाने का सफल प्रयास किया गया था, उसी तरह अगर सरकार निविदा मंगाकर बंदरगाह के खाद्यतेलों को राशन की दुकानों के माध्यम से बिक्री करवाये तो बहुत सी समस्याओं से निजात मिल जायेगा। महंगाई पर रोक भी लगेगी और उपभोक्ताओं को खाद्यतेल सस्ते में उपलब्ध होगा। इसमें सरकार को कुछ खास करना भी नहीं होगा। निविदाकर्ता खुद ब खुद राशन की दुकानों पर खाद्यतेल उपलब्ध करा देंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी नीति बनाने पर जोर देना चाहिये कि देशी खाद्यतेल पेराई मिलें अपना संचालन कर सकें क्योंकि मौजूदा समय में जो स्थिति है उससे तो केवल अर्जेन्टीना और ब्राजील की फैक्टरियां चल रही हैं। देश की खाद्यतेल मिलों और किसानों के हितों की रक्षा करना तथा देशी तेल तिलहनों का बाजार बनाना बेहद आवश्यक है। देश में बड़ी संख्या में दुधारू मवेशियों और मुर्गीपालन के लिए खल और डीओसी की प्राप्ति देशी तेल तिलहनों से ही होती है।

इस बीच, मलेशिया एक्सचेंज में 1.65 प्रतिशत की तेजी है और शाम का बाजार बंद है जबकि शिकागो एक्सचेंज फिलहाल सुधार का रुख है।

शुक्रवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 4,795-4,895 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 6,605-6,665 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 16,530 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,460-2,735 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 9,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,580 -1,660 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,580 -1,690 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 9,850 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,550 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,050 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,200 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,500 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,150 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,250 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 5,215-5,280 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,980-5,045 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण