Modi Govt on Sugar Price Increase: भारत में क्यों बढ़ रहे चीनी के दाम…क्या एथनॉल है असली वजह? बवाल मचने के बाद मोदी सरकार ने मीडिया के सामने दिया जवाब

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Modi Govt on Sugar Price Increase: भारत में क्यों बढ़ रहे चीनी के दाम...क्या एथनॉल है असली वजह? बवाल मचने के बाद मोदी सरकार ने मीडिया के सामने दिया जवाब

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  • Publish Date - August 22, 2026 / 09:43 AM IST,
    Updated On - August 22, 2026 / 02:06 PM IST

Modi Govt on Sugar Price Increase: भारत में क्यों बढ़ रहे चीनी के दाम...क्या एथनॉल है असली वजह? बवाल मचने के बाद मोदी सरकार ने मीडिया के सामने दिया जवाब / Image: AI Generated

HIGHLIGHTS
  • चीनी के दाम में तेज उछाल
  • एथनॉल को जिम्मेदार मानने से इनकार
  • 10 लाख टन कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात मंजूर

नयी दिल्ली: Modi Govt on Sugar Price Increase सरकार ने शुक्रवार को इस दावे को खारिज कर दिया कि एथनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से इसकी कीमतों में तेज वृद्धि हो रही है। सरकार ने कहा कि घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त भंडार होने के बावजूद चीनी उद्योग ने कीमतें बढ़ाई हैं। इसके साथ ही सरकार ने चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ राज्यों को कार्रवाई करने और चीनी मिलों में इस साल 15 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू कराने की तैयारी करने को कहा है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने चीनी की उपलब्धता और कीमतों के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि सरकार ने एहतियाती कदम के तौर पर 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा, कारोबारियों और शीतल पेय एवं आइसक्रीम विनिर्माताओं जैसे थोक उपभोक्ताओं के लिए भंडारण सीमा भी लागू की गई है। उन्होंने कहा कि विपणन सत्र 2025-26 में चीनी का उत्पादन पहले के 343 लाख टन के अनुमान से घटकर 306 लाख टन रह जाने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद देश में पर्याप्त भंडार है। घरेलू चीनी की सालाना मांग करीब 280-285 लाख टन है।

भारत में क्यों बढ़ रहे चीनी के दाम?

Modi Govt on Sugar Price Increase चोपड़ा ने कहा कि गन्ने की फसल में ‘रेड रॉट’ और ‘टॉप बोरर’ रोग लगने तथा अधिक बारिश से जलभराव के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय औसत खुदरा चीनी कीमत 20 जुलाई के 48 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 56 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। वहीं, चीनी की मिलों के स्तर पर कीमत करीब सात-दस दिन में 47-48 रुपये से बढ़कर 62 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। उन्होंने इस तीव्र मूल्य वृद्धि को ‘पूरी तरह अनुचित’ बताया। चोपड़ा ने कहा, ‘‘हाल में चीनी की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। करीब 15 दिन पहले कीमत 48 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अब बढ़कर 56 रुपये हो गई है। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इस वृद्धि का कोई बुनियादी कारण नहीं है।’’  उन्होंने कहा कि चीनी के दाम में हाल की तेजी को एथनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ना सही नहीं है। चालू 2025-26 विपणन वर्ष में केवल 28 लाख टन चीनी का इस्तेमाल एथनॉल उत्पादन के लिए हुआ है।

एथनॉल का केवल एक-चौथाई हिस्सा ही चीनी से बनता है

चोपड़ा ने कहा कि विविधीकरण की वजह से अब एथनॉल का केवल एक-चौथाई हिस्सा ही चीनी से बनता है, जबकि बाकी मुख्य रूप से मक्का जैसे अनाज से तैयार होता है। उन्होंने कहा कि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार है और किसी भी संबंधित पक्ष को इसका अनुचित फायदा उठाकर मुनाफाखोरी, जमाखोरी या सट्टेबाजी नहीं करनी चाहिए तथा यह धारणा नहीं बनानी चाहिए कि देश में चीनी की कमी है। खाद्य सचिव ने कहा कि सितंबर 2026 के अंत में देश में 33-35 लाख टन चीनी का भंडार रहने का अनुमान है। इस साल चीनी मिलों में 15 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू होने की उम्मीद है, जिससे अक्टूबर में करीब 10-12 लाख टन अतिरिक्त चीनी उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए अग्रिम मंजूरी योजना के तहत कच्ची चीनी आयात करने वाली रिफाइनरियों को अपने भंडार की घरेलू बिक्री की अनुमति भी दी गई है। इससे तत्काल तीन-चार लाख टन चीनी की अतिरिक्त उपलब्धता होने की उम्मीद है।

चीनी का भंडार रखने की अनुमति नहीं

चोपड़ा ने कहा कि सरकार ने प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों के साथ बैठक की है और उन्हें जमाखोरों, कालाबाजारियों एवं सट्टेबाजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा है। इसके अलावा सरकार कारोबारियों की मौजूदा 400 टन की भंडार सीमा को और कम करने पर भी विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि एक सितंबर से थोक उपभोक्ताओं को भी 15 दिन की खपत से अधिक चीनी का भंडार रखने की अनुमति नहीं होगी। चोपड़ा ने उम्मीद जतायी कि सरकार के इन कदमों से बाजार में चीनी की उपलब्धता सुधरेगी और त्योहारी मौसम एवं उसके बाद भी भंडार को लेकर कोई समस्या नहीं होगी।

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चीनी के दाम कितने बढ़ गए हैं?

अखिल भारतीय औसत खुदरा चीनी कीमत 20 जुलाई के करीब ₹48 से बढ़कर ₹56 प्रति किलो हो गई है।

क्या सरकार ने चीनी की कीमत बढ़ने के लिए एथनॉल को जिम्मेदार माना है?

नहीं। सरकार ने एथनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल को हालिया कीमत वृद्धि का प्रमुख कारण मानने से इनकार किया है।

सरकार ने चीनी की कीमत नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाया है?

सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है और राज्यों को जमाखोरी व कालाबाजारी पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

सितंबर 2026 के अंत तक देश में कितना चीनी स्टॉक रहने का अनुमान है?

सरकार के अनुमान के मुताबिक सितंबर के अंत तक देश में 33-35 लाख टन चीनी का भंडार रह सकता है।

थोक उपभोक्ता कितनी चीनी का स्टॉक रख सकेंगे?

1 सितंबर से थोक उपभोक्ताओं को अधिकतम 15 दिन की खपत के बराबर चीनी का भंडार रखने की अनुमति होगी।