अधिक आयकर संग्रह का मतलब मध्यम वर्ग को दबाना नहीं, यह उनके आगे बढ़ने का सबूत: सीतारमण

अधिक आयकर संग्रह का मतलब मध्यम वर्ग को दबाना नहीं, यह उनके आगे बढ़ने का सबूत: सीतारमण

अधिक आयकर संग्रह का मतलब मध्यम वर्ग को दबाना नहीं, यह उनके आगे बढ़ने का सबूत: सीतारमण
Modified Date: February 12, 2026 / 08:21 pm IST
Published Date: February 12, 2026 8:21 pm IST

(तस्वीर के साथ)

नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि व्यक्तिगत आयकर संग्रह बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि देश में मध्यम वर्ग को दबाया जा रहा है।

उन्होंने 2026-27 के केंद्रीय बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि देश में मध्यम वर्ग को दबाने का कोई सबूत नहीं है, बल्कि उनके आगे बढ़ने के सबूत जरूर हैं।

सीतारमण ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना अर्थव्यस्था को मृत बताने वाले उनके बयान को नकारात्मक करार देते हुए कहा कि वह देश की जनता का मजाक उड़ा रहे हैं, जो वास्तव में भारत के वृद्धि में अपना योगदान दे रही है।

विपक्ष ने यह आरोप लगाया कि मध्यम वर्ग, अमीर और गरीब वर्गों के बीच फंसा हुआ है। इस पर सीतारमण ने कहा कि ऐसा इसलिए लगता है क्योंकि व्यक्तिगत आयकर का संग्रह कॉरपोरेट कर से अधिक है।

उन्होंने कहा, ‘‘…वास्तव में, पिछले दस साल में किए गए आर्थिक सुधारों के कारण ऐतिहासिक रूप से मध्यम वर्ग का विस्तार हुआ है। इसके पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। व्यक्तिगत आयकर का अधिक संग्रह का मतलब यह नहीं है कि मध्यम वर्ग को दबाया जा रहा है।’’

सीतारमण ने कहा कि आज कर योग्य आय वाले लोगों की संख्या अधिक है। अब संगठित क्षेत्र में अधिक आय दिखाई देती है।

उन्होंने कहा, “अर्थव्यवस्था अब केवल कुछ गिने-चुने वर्ग तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें भागीदारी बढ़ी है। मध्यम वर्ग का दायरा बढ़ रहा है। 2013-14 और 2024-25 के बीच, करदाताओं की संख्या, यानी रिटर्न दाखिल करने वाले या टीडीएस कटवाने वालों की संख्या, 5.26 करोड़ से बढ़कर 12.13 करोड़ हो गई है।’’

पिछले 11 वर्षों में, करदाताओं की संख्या दोगुनी हो गई है। यह संचयी रूप से सालाना 7.9 प्रतिशत की वृद्धि है।

वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘यह इस देश में मध्यम वर्ग का सबसे बड़ा संरचनात्मक विस्तार है। इसलिए, अगर कर का दायरा बढ़ रहा है तो दबाव नहीं हो सकता…। लोग कर देने के लिए आगे आ रहे हैं और वे इसलिए आगे नहीं आ रहे हैं क्योंकि हम दरें बढ़ा रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि इस विस्तार के बावजूद, आयकर सीमा सभी के लिए 12 लाख रुपये और वेतनभोगी वर्ग के लिए 12.75 लाख रुपये तक बढ़ायी गई है।

सीतारमण ने कहा, ‘‘अगर 12.75 लाख रुपये कमाने वाले वेतनभोगी वर्ग को कर नहीं देना पड़ता, तो फिर दबाने वाली बात कहां है? दूसरा, मानक कटौती भी बढ़ाई गई है। नई कर व्यवस्था ने कर रिटर्न भरने और जांच-पड़ताल को सरल बना दिया है।’’

इसके अलावा, अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों और दरों को युक्तिसंगत बनाये जाने से भी घरेलू खर्च कम हुए हैं। जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने से वस्तुओं के दाम कम होने के कारण लोगों के मासिक खर्च कम हो रहे हैं।

सीतारमण ने कहा, ‘‘महंगाई भी ऐतिहासिक रूप से कम है। इसलिए, बढ़ती वास्तविक आय और रिकॉर्ड कम मुद्रास्फीति के साथ यह नहीं कहा जा सकता है कि मध्यम वर्ग दबाव में है। दोनों चीजें साथ नहीं चल सकती…।’’

उन्होंने कहा कि बजट में उठाए गए कदम एक लचीले, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के प्रति देश के संकल्प को बताते हैं। उन्होंने राज्यसभा सदस्यों से अपने-अपने राज्य सरकारों से बजट में घोषित योजनाओं में भाग लेने का आग्रह किया।

कई कल्याणकारी योजनाओं में व्यय कटौती के विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि किसी भी योजना के लिए राज्यों को कोष आवंटन में कोई कमी नहीं है।

उन्होंने सरकारी योजनाओं पर व्यय की तुलना करते कहा कि पिछले 10 साल में 14 सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं में केवल 37,000 करोड़ रुपये ही बिना खर्च किए रहे, जबकि संप्रग शासन के दौरान यह राशि 94,000 करोड़ रुपये थी।

सीतारमण ने आवंटन के बिना योजनाओं की घोषणा करने के विपक्ष के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने इस संदर्भ में पिछले संप्रग सरकार के दौरान के कई उदाहरण दिए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस बढ़ते कर्ज पर ‘मगरमच्छ के आंसू’ बहा रही है। वास्तविकता यह है कि सरकार अत्यधिक कर्ज नहीं ले रही है।

वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में सीधे 48 लाख करोड़ रुपये से अधिक भेजे हैं और लीकेज यानी चोरी को रोककर 4.31 लाख करोड़ रुपये की बचत की है।

सीतारमण ने कहा कि बजट अतीत को नहीं भूलता। नाजुक स्थिति, दहाई अंक में मुद्रास्फीति को याद रखता है। वहीं आज भारत में मुद्रास्फीति का कोई संकट नहीं है। इसे काबू में कर लिया गया है।

विपक्ष पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि रोजगार के बिना वृद्धि संप्रग सरकार की कहानी थी, वर्तमान सरकार की नहीं।

सीतारमण ने कहा कि देश एक ऐसे दुर्लभ संयोग से गुजर रहा है, जब उसने ‘वृहद आर्थिक संतुलन’ हासिल किया है। यह एक अनूठी उपलब्धि है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह पूरे देश की उपलब्धि है। यानी, जीडीपी की वृद्धि दर अच्छी और ऊंची है तथा मुद्रास्फीति कम है, जो लगातार इसी स्तर पर बनी हुई है।’’

उन्होंने कहा कि सरकार ने 2026-27 के बजट में ‘शिक्षा से रोजगार और उद्यम’ स्थायी समिति का गठन करने का प्रस्ताव किया है ताकि युवाओं को सेवा क्षेत्र के लिए तैयार किया जा सके।

भाषा रमण अजय

अजय


लेखक के बारे में