दोपहिया हादसों में 2019-23 के दौरान 3.3 लाख से अधिक लोगों की मौत

दोपहिया हादसों में 2019-23 के दौरान 3.3 लाख से अधिक लोगों की मौत

दोपहिया हादसों में 2019-23 के दौरान 3.3 लाख से अधिक लोगों की मौत
Modified Date: January 15, 2026 / 07:17 pm IST
Published Date: January 15, 2026 7:17 pm IST

(विजय कुमार सिंह)

नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) देश में 2019-2023 के दौरान हुए विभिन्न सड़क हादसों में हुई कुल 7.78 लाख लोगों की मौत हुई। इनमें से लगभग 3.35 लाख लोगों की मौत दोपहिया वाहनों से जुड़ी थीं। केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों में यह बात सामने आई।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि केंद्र सरकार सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए काम कर रही है।

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भारत के शहरों और गांवों की जीवन रेखा माने जाने वाले दोपहिया वाहनों की बढ़ती संख्या के साथ ही, इनसे जुड़ी दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों का उच्च आंकड़ा वाहन चालकों और यात्रियों के लिए बड़ा संकट बन गया है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, साल 2023 में सड़क दुर्घटनाओं में हुई कुल मौतों में 45 प्रतिशत यानी 77,539 मौतें दोपहिया सवारों की थीं।

इसमें लगभग 50,000 ऐसे सवार थे जिन्होंने हेलमेट नहीं पहना था। इसके अलावा, राष्ट्रीय राजधानी में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में 38 प्रतिशत मौत सवारों की होती हैं।

देश में कुल सड़क हादसों में दोपहिया वाहनों से जुड़ी मौतों की हिस्सेदारी 2014 के 30 प्रतिशत से बढ़कर 2023 तक 45 प्रतिशत हो गई है।

इस रुझान से चिंतित मंत्रालय ने दोपहिया वाहनों में एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस) को बढ़ावा देने और वाहन की खरीद के समय गुणवत्ता-प्रमाणित हेलमेट उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है।

गडकरी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘सरकार दोपहिया वाहनों के लिए सड़कों को सुरक्षित बनाने पर काम कर रही है। एक जनवरी, 2026 के बाद निर्मित 125 सीसी से कम वाले वाहनों सहित सभी दोपहिया वाहनों के लिए एबीएस अनिवार्य कर दिया गया है।’

गडकरी ने कहा कि डीलरों के लिए अब प्रत्येक दोपहिया वाहन की बिक्री के साथ दो बीआईएस-प्रमाणित हेलमेट देना अनिवार्य है। इससे पहले, एबीएस केवल 125 सीसी से ऊपर की मोटरसाइकिलों के लिए जरूरी था।

गडकरी ने कहा कि मंत्रालय ने डीलर के लिए बेचे जाने वाले प्रत्येक दोपहिया वाहन के साथ दो बीआईएस प्रमाणित हेलमेट देना अनिवार्य कर दिया है।

पहले एबीएस केवल 125 सीसी से अधिक पॉवर वाली मोटरसाइकिल के लिए ही अनिवार्य था। यह सुरक्षा फीचर अचानक ब्रेक लगाने पर पहियों को लॉक होने से रोकता है और नियंत्रण बेहतर बनाता है।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि 2026 में मंत्रालय की सर्वोच्च प्राथमिकता एक नया ‘सड़क सुरक्षा विधेयक’ पारित करना होगा, ताकि हर साल होने वाली 1.8 लाख मौतों को कम किया जा सके।

उन्होंने कहा कि इसे अगले सत्र में ही संसद के समक्ष रखने का प्रयास किया जाएगा।

गडकरी ने कहा कि सरकार ने रोड इंजीनियरिंग में सुधार, कानूनों को सख्त करने और जुर्माने में वृद्धि के प्रयास किए हैं।

उन्होंने चिंता जताई कि देश में सालाना पांच लाख हादसों में 1.8 लाख लोगों की मौत होती हैं, जिनमें 66 प्रतिशत लोग 18-34 आयु वर्ग के होते हैं।

मंत्री ने स्वीकार किया कि तमाम कोशिशों के बावजूद सरकार अभी तक दुर्घटना में मौत को कम करने में सफल नहीं हुई है।

आंकड़ों के अनुसार, 2024 में सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या 2.3 प्रतिशत बढ़कर 1.77 लाख से अधिक हो गई, जो प्रतिदिन 485 मौतों के बराबर है।

सेवलाइफ फाउंडेशन के संस्थापक पीयूष तिवारी ने बताया कि 2023 में 70 प्रतिशत दोपहिया दुर्घटनाओं में मौत हेलमेट न पहनने के कारण हुईं, जो सुरक्षा कानूनों के ढीले प्रवर्तन को दर्शाता है। उन्होंने अत्यधिक गति और गलत दिशा में वाहन चलाने को भी बड़े जोखिम बताए।

तिवारी ने कहा कि दोपहिया वाहनों के बीच आपस में टक्कर से 35.5 प्रतिशत मौतें होती हैं, जो असुरक्षित ओवरटेकिंग और लेन अनुशासन की कमी जैसे मुद्दों की ओर इशारा करती हैं।

भाषा सुमित रमण

रमण


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