नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) भारत में 98 प्रतिशत मानव संसाधन (एचआर) प्रमुखों का मानना है कि यदि भर्ती के दौरान अंग्रेजी कौशल का बेहतर आकलन किया जाए, तो संगठन अधिक कुशल होंगे। ‘एजुकेशनल टेस्टिंग सर्विसेज’ (ईटीएस) की ‘टीओईआईसी ग्लोबल इंग्लिश स्किल्स’ रिपोर्ट यह भी कहती है कि कृत्रिम मेधा (एआई) खराब अंग्रेजी दक्षता की भरपाई नहीं कर सकता।
टोफेल और जीआरई जैसी परीक्षाएं आयोजित करने वाली प्रिंसटन स्थित संस्था ईटीएस ने यह रिपोर्ट भारत में 87 शीर्ष एचआर अधिकारियों के सर्वेक्षण के आधार पर तैयार की है।
यह शोध 17 देशों के 1,325 एचआर अधिकारियों पर किए गए व्यापक सर्वेक्षण का हिस्सा है, जिसमें ब्राजील, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया, भारत, जापान, मेक्सिको, मोरोक्को, सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया, स्पेन, ताइवान, थाइलैंड, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात और वियतनाम शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ज्यादातर नियोक्ताओं का मानना है कि पांच साल पहले की तुलना में अब अंग्रेजी दक्षता अधिक महत्वपूर्ण हो गई है, हालांकि इसके मूल्यांकन की गुणवत्ता और लागत जैसी बाधाएं अब भी बनी हुई हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकांश एचआर प्रमुखों का मानना है कि एआई खराब अंग्रेजी दक्षता का विकल्प नहीं हो सकता, जिससे विश्वसनीय मूल्यांकन की जरूरत और बढ़ जाती है।
भारत में 94 प्रतिशत एचआर प्रमुखों का कहना है कि बढ़ते वैश्विक सहयोग ने अंग्रेजी की आवश्यकता को बढ़ा दिया है, जबकि 84 प्रतिशत का मानना है कि अंग्रेजी की कमी प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने का कारण बनती है।
सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में 98 प्रतिशत एचआर प्रमुखों का मानना है कि बेहतर अंग्रेजी मूल्यांकन से उनके संगठनों की दक्षता में सुधार होगा।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 87 प्रतिशत एचआर अधिकारियों का मानना है कि एआई के आने से अंग्रेजी दक्षता की जरूरत और अधिक बढ़ गई है।
ईटीएस (दक्षिण एशिया) के क्षेत्रीय निदेशक अजय प्रताप सिंह ने कहा कि वैश्विक व्यापार और प्रौद्योगिकी में भारत की भूमिका बढ़ रही है। जैसे-जैसे कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार कर रही हैं, वे भाषाई तैयारी को कार्यबल की मुख्य क्षमता के रूप में देख रही हैं।
भाषा सुमित अजय
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