विदेशों में तेजी के बावजूद मांग कमजोर होने से अधिकांश तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट

विदेशों में तेजी के बावजूद मांग कमजोर होने से अधिकांश तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट

विदेशों में तेजी के बावजूद मांग कमजोर होने से अधिकांश तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट
Modified Date: December 9, 2024 / 08:47 pm IST
Published Date: December 9, 2024 8:47 pm IST

नयी दिल्ली, नौ दिसंबर (भाषा) विदेशी बाजारों में तेजी के बावजूद सोमवार को मांग कमजोर रहने से देश के प्रमुख बाजारों में मूंगफली तिलहन, सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल गिरावट के साथ बंद हुए।

बिनौला खल में गिरावट के बीच कारोबारी धारणा प्रभावित रहने से जहां सरसों तेल-तिलहन और बिनौला तेल के दाम पूर्व-स्तर पर बने रहे वहीं मूंगफली तेल के दाम में सुधार देखने को मिला।

बाजार सूत्रों ने कहा कि मूंगफली में खाद्यतेल की तुलना में खल अधिक निकलता है और बिनौला खल का दाम टूटने से बाजार की कारोबारी धारणा खराब हो रही है। ऐसी स्थिति में मांग कमजोर होने से सरसों और मूंगफली खल के दाम भी टूट रहे हैं। खल का दाम टूटने से मूंगफली तिलहन में गिरावट है जबकि मूंगफली तेल के दाम में सुधार है।

सूत्रों ने कहा कि खल नहीं बिकने पर कारोबारी उस घाटे की भरपाई तेल का दाम बढ़ाकर करते हैं। ऐसे में सरकार को इस पर नजर रखनी चाहिए कि कपास नरमा की बिक्री के समय कौन लोग ‘सिंडिकेट’ बनाकर किसानों का माल सस्ते में लेना चाहते हैं। ऐसे वायदा कारोबार के सट्टेबाजों को सख्ती से निपटने की आवश्यकता है।

सूत्रों के मुताबिक, बिनौला खल के दाम तोड़े जाने की वजह से मुर्गीदाने में उपयोग होने वाले सोयाबीन डी-आयल्ड केक (डीओसी) की भी मांग घटी है। सोयाबीन उत्पादन में मुख्य खेल डीओसी का ही होता है क्योंकि सोयाबीन में भी तेल कम और डीओसी अधिक निकलता है। इसका निर्यात कर लाभ कमाने के चक्कर में किसान सोयाबीन की बुवाई करते हैं।

कारोबारी सूत्रों ने कहा कि बिनौला खल का दाम टूटने का असर बाकी तेल-तिलहनों पर भी आएगा। अगर सरकार ने इस पर समुचित ध्यान नहीं दिया तो यह घरेलू तिलहन उत्पादन को प्रभावित करेगा। आज सरकार ने जो बुवाई के आंकड़े जारी किये हैं, उसमें तिलहन खेती के रकबे में कमी आने का उल्लेख किया गया है।

सूत्रों ने कहा कि विदेशों में मजबूती रहने के बावजूद कारोबारियों की कमजोर मांग होने से मूंगफली तिलहन, सोयाबीन तेल-तिलहन, सीपीओ एवं पामोलीन के दाम में गिरावट आई। जबकि कम आवक के बीच सरसों तेल-तिलहन और बिनौला तेल के दाम पूर्व-स्तर पर बने रहे। खल का दाम टूटने से मूंगफली तेल के दाम में सुधार रहा।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 6,575-6,625 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 6,250-6,575 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 14,500 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,200-2,500 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 13,725 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,275-2,375 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,275-2,400 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,700 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,650 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 9,750 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 13,350 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 12,800 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 14,600 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 13,550 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 4,250-4,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 3,950-3,985 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,100 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश प्रेम

प्रेम


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