नयी दिल्ली, 29 जून (भाषा) वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निर्यात वृद्धि बनाए रखने के मकसद से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) समेत भारत के निर्यातकों को पारंपरिक विकसित बाजारों पर निर्भर रहने के बजाय नए निर्यात बाजारों की तलाश करनी चाहिए। एक्जिम बैंक की शीर्ष अधिकारी ने सोमवार को यह बात कही।
एक्जिम बैंक की प्रबंध निदेशक हर्षा बंगारी ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘एक्जिम बैंक भारतीय कंपनियों, खासकर एमएसएमई को नए बाज़ारों पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करता है क्योंकि कभी-कभी हमें लगता है कि विकसित या पारंपरिक बाज़ारों में अब और गुंजाइश नहीं बची है और नए बाजारों में कारोबार करने के दौरान निर्यातकों की सबसे बड़ी चिंता भुगतान की सुरक्षा होती है।’’
बंगारी ने बताया कि एक्जिम बैंक नए बाजारों में प्रवेश करने वाले निर्यातकों को भुगतान संबंधी जोखिम कम करने के लिए व्यापार वित्तपोषण सुविधा उपलब्ध कराता है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की शुल्क संबंधी कार्रवाइयों, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक लॉजिस्टिक चुनौतियों जैसी परिस्थितियों के कारण एमएसएमई की वित्तपोषण आवश्यकताएं बढ़ गई हैं। इन वैश्विक अनिश्चितताओं का असर उनके नकदी प्रवाह पर भी पड़ा है।
बंगारी ने कहा कि वैश्विक तनाव, अमेरिका की शुल्क नीति, पश्चिम एशिया संघर्ष और कुछ परिवहन मार्गों के बाधित होने से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। इससे माल ढुलाई में अधिक समय लग रहा है और एमएसएमई क्षेत्र की ऋण आवश्यकता पहले की तुलना में बढ़ी है।
भाषा यासिर अजय
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