सरसों तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल, सीपीओ और पामोलीन की कीमतों में तेजी

सरसों तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल, सीपीओ और पामोलीन की कीमतों में तेजी

सरसों तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल, सीपीओ और पामोलीन की कीमतों में तेजी
Modified Date: November 29, 2022 / 08:31 pm IST
Published Date: September 21, 2022 7:31 pm IST

मुंबई, 21 सितंबर (भाषा) विदेशी बाजारों में तेजी के रुख के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को खाद्य तेलों की आपूर्ति कम रहने के कारण सरसों तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतों में बढ़त का रुख रहा। बाकी तेल-तिलहनों के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि त्योहारों के मौसम से ठीक पहले सरकार द्वारा खाद्य तेलों के आयात की सीमा निर्धारित करने के फैसले के बाद बाजार में आपूर्ति घटने से तेल-तिलहनों के भाव मजबूत हो गये हैं। सरकार ने तो स्थानीय मंडियों में तेल-तिलहनों की आपूर्ति बढ़ाने के उद्देश्य से अगले दो साल के लिए सालाना 20-20 लाख टन सूरजमुखी और सोयाबीन डीगम (जो हल्के तेल होते हैं) के शुल्कमुक्त आयात करने की छूट दी। पर इस आयात की एक सीमा निर्धारित कर दिये जाने से बाकी आयात रुक गया है। सूरजमुखी तेल की देश में खपत या मांग महीने में लगभग 2.50 लाख टन की होती है जबकि 20 लाख टन सालाना के हिसाब से प्रतिमाह लगभग 1.65 लाख टन सूरजमुखी तेल का ही आयात किया जा सकेगा। बाकी आयात पर सात रुपये किलो की दर से आयात शुल्क अदा करना होगा जिससे बाकी आयातित तेल, शुल्कमुक्त आयातित तेल के सामने गैर-प्रतिस्पर्धी हो जायेंगे। इसकी वजह से ‘शॉर्ट सप्लाई’ की स्थिति बन गई है। इसके कारण तेल कीमतें सस्ता होने के बजाय पहले से कहीं अधिक महंगी हो चली हैं।

सूत्रों ने कहा कि आगे त्योहारों के मौसम और आगामी जाड़े की मांग और बढ़ेगी और खाद्य तेल कीमतों को नरम करने के लिए सरकार को आयात की सीमा खत्म कर देनी चाहिये या पहले की तरह सूरजमुखी तेल पर पांच प्रतिशत का आयात शुल्क लगा देना चाहिये।

सूत्रों ने कहा कि देश के प्रमुख तेल-तिलहन संगठनों को इस फैसले के संदर्भ में उपयुक्त मशविरा देना चाहिये कि सरकार अपने फैसले की समीक्षा करते हुए खाद्य तेलों की कीमतों को कम करने की अपनी वांछित इच्छा को पूरा करने के लिए कोई दमदार फैसला कर सके। त्योहारों के दौरान इस फैसले के उल्टे परिणाम सामने आये हैं जिसमें सुधार करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में 3.5 प्रतिशत और शिकॉगो एक्सचेंज में लगभग एक प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। खाद्य तेलों की आपूर्ति घटने के बीच आम तेल-तिलहन कीमतों में तेजी के अनुरूप सरसों तेल-तिलहन के भाव मजबूती के साथ बंद हुए। हालांकि, सरसों तेल का भाव पिछले साल के मुकाबले लगभग 35 रुपये किलो सस्ता है। सरसों तेल प्रसंस्करणकर्ता तेल मिलों को भारी नुकसान हो रहा है क्योंकि लागत के मुकाबले बिक्री मूल्य कम है। मिलों के द्वारा आढ़तियों के भुगतान में भी देर हो रही है। कम आपूर्ति के कारण सोयाबीन तेल कीमतों में सुधार आया। तेजी के आम रुख के कारण सीपीओ और पोमोलीन तेल कीमतों में भी तेजी आई।

ऊंचे भाव पर लिवाली कमजोर रहने, लगभग 10 दिन में नई फसल की आवक शुरू होने की उम्मीद के बीच सोयाबीन तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे। हालांकि, आगे जाकर इसमें गिरावट आने की पूरी संभावना है। मूंगफली तेल-तिलहन और बिनौला तेल के भाव भी पूर्वस्तर पर बंद हुए।

बुधवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 6,755-6,805 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली -7,170-7235 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 16,750 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली सॉल्वेंट रिफाइंड तेल 2,745 – 2,935 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 13,600 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,115-2,245 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,185-2,300 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,000-19,500 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 12,500 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,500 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 12,000 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,250 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 9,250 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 5,200-5,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज 5,175- 5,275 रुपये प्रति क्विंटल। 50 रुपये तेज

मक्का खल (सरिस्का) 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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