बीते सप्ताह मिलों के दाम घटाने से सरसों में गिरावट, अन्य तेल-तिलहनों के दाम में सुधार
बीते सप्ताह मिलों के दाम घटाने से सरसों में गिरावट, अन्य तेल-तिलहनों के दाम में सुधार
नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) बड़ी तेल मिलों द्वारा सरसों के दाम घटाये जाने की वजह से बीते सप्ताह जहां एक ओर जहां सरसों तेल-तिलहन के दाम गिरावट के साथ बंद हुए, वहीं विदेशी बाजारों में छुट्टियों की वजह से कामकाज सुस्त रहने के बावजूद शादी-विवाह के मौसम की मांग से देश के तेल-तिलहन बाजारों में सोयाबीन एवं मूंगफली तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल की कीमतें मजबूती के साथ बंद हुईं।
बाजार सूत्रों ने कहा कि बीते सप्ताह सरसों के मामले में देखा गया कि बाकी वर्षो की तुलना में किसान रोक-रोक कर अपनी फसल बाजार में उतार रहे हैं। सोयाबीन, सूरजमुखी और पामोलीन से भी सस्ता होने के कारण उत्तर भारत में सरसों की मांग अच्छी है। बड़ी मिलें सस्ते में सरसों की खरीद करने के लिए कभी इसके उत्पादन अनुमान को बढ़ा-चढ़ा कर बताती दिखीं, तो कभी सटोरियों को यह अफवाह भी फैलाते देखा गया कि आयातित तेलों के आयात शुल्क को घटाने के बारे में विचार-विमर्श चल रहा है। इन अफवाहों से विदेशों में बाजार और मजबूत हो गये और बीते सप्ताह सरसों तेल-तिलहन के दाम गिरावट दर्शाते बंद हुए।
उन्होंने कहा कि पहले भी आयात शुल्क बढ़ाने घटाने का कदम निरर्थक साबित हुआ है क्योंकि पिछले अनुभव यह रहे हैं कि आवक बढ़ाने के मकसद से जब आयात शुल्क घटाया गया है तो कई बार विदेशों में खाद्य तेलों के दाम और बढ़ा दिये जाते हैं। पश्चिम एशिया युद्ध के कारण मौजूदा समय में विदेशों में खाद्य तेलों के दाम जिस कदर मजबूत हुए हैं, वैसे समय में सरसों का उत्पादन अधिक होना देश के लिए राहत की तरह है। देशी तेल-तिलहनों का उत्पादन बढ़ाना और इनका बाजार बनाना ही एक ऐसा रास्ता है जो हमें मुश्किल के वक्त में भी रास्ता दे सकता है।
सूत्रों ने कहा कि समीक्षाधीन सप्ताह से पहले के हफ्ते में जो सोयाबीन तेल का दाम 1,360-65 डॉलर प्रति टन था वह बीते सप्ताह बढ़कर 1,390-95 डॉलर प्रति टन हो गया। बाजार में सोयाबीन की आपूर्ति कम हो रही है और शादी-विवाह के मौसम की भरपूर मांग है। ऐसी स्थिति में बीते सप्ताह सोयाबीन तेल-तिलहन के दाम मजबूती दर्शाते बंद हुए।
उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में एक जुलाई से बायो-डीजल के निर्माण में पामतेल का उपयोग बढ़ाये जाने की खबर के बीच मलेशिया में पाम-पामोलीन के दाम मजबूत हो गये। इसके अलावा गर्मी की शुरुआत के कारण मार्च में इसका निर्यात भी बढ़ा है जो पाम-पामोलीन तेल कीमतों में सुधार का मुख्य कारण है। भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देश में भी पाम-पामोलीन तेल की मांग बढ़ने लगी है।
सूत्रों ने कहा कि कपास नरमा की आवक समीक्षाधीन सप्ताह से पहले के हफ्ते में लगभग 43 हजार गांठ की हो रही थी वह घटकर बीते सप्ताह 36 हजार गांठ रह गई। कपास नरमा से ही बिनौला प्राप्त होता है। आवक की कमी और मूंगफली के महंगा होने के बीच बिनौला तेल की मांग बढ़ने के कारण बीते सप्ताह बिनौला तेल के दाम मजबूती दर्शाते बंद हुए।
सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह सरसों दाना 100 रुपये की गिरावट के साथ 6,925-6,950 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। दादरी मंडी में बिकने वाला सरसों तेल 100 रुपये की गिरावट के साथ 14,725 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल का भाव क्रमश: 20-20 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 2,440-2,540 रुपये और 2,440-2,585 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुआ।
समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाने और सोयाबीन लूज के थोक भाव क्रमश: 75-75 रुपये के सुधार के साथ क्रमश: 5,800-5,850 रुपये और 5,475-5,550 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।
इसी प्रकार, दिल्ली में सोयाबीन तेल 375 रुपये के सुधार के साथ 16,825 रुपये प्रति क्विंटल, इंदौर में सोयाबीन तेल 475 रुपये के सुधार के साथ 16,225 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल का दाम 175 रुपये के सुधार के साथ 13,475 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
मूंगफली तिलहन का दाम 50 रुपये की मजबूती के साथ 7,300-7,775 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 100 रुपये के सुधार के साथ 17,650 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 15 रुपये की मजबूती के साथ 2,785-3,085 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।
समीक्षाधीन सप्ताह में कारोबारी धारणा में आम मजबूती के रुख के अनुरूप, सीपीओ तेल का दाम 100 रुपये के सुधार के साथ 13,725 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन दिल्ली का भाव 250 रुपये सुधरकर 15,675 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल का भाव भी 250 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 14,625 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
तेजी के आम रुख के अनुरूप, बिनौला तेल का दाम 600 रुपये के सुधार के साथ 15,450 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
भाषा राजेश
अजय
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