नायडू ने एयरबस, बोइंग को विमान उपकरण विनिर्माण सुविधाएं स्थापित करने का दिया न्यौता

नायडू ने एयरबस, बोइंग को विमान उपकरण विनिर्माण सुविधाएं स्थापित करने का दिया न्यौता

नायडू ने एयरबस, बोइंग को विमान उपकरण विनिर्माण सुविधाएं स्थापित करने का दिया न्यौता
Modified Date: January 23, 2026 / 08:23 pm IST
Published Date: January 23, 2026 8:23 pm IST

दावोस, 23 जनवरी (भाषा) केंद्रीय नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू ने दावोस में भारत के वैश्विक विमानन केंद्र बनने की क्षमताओं का उल्लेख करते हुए एयरबस और बोइंग जैसी दिग्गज कंपनियों से भारत में विमान कल-पुर्जा विनिर्माण और एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल) सुविधाएं स्थापित करने का आग्रह किया है। साथ ही उन्होंने भारत में हेलीकॉप्टर सेवा के विस्तार के लिए के लिए भी सहयोग की बात कही।

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हुए मंत्री ने 2047 तक भारत को एक वैश्विक विमानन केंद्र के रूप में उभारने के सरकार के दृष्टिकोण को साझा किया।

भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे तेजी से बढ़ने वाला घरेलू विमानन बाजार है। सरकार का लक्ष्य 2047 तक हवाई अड्डों की संख्या को मौजूदा 164 से बढ़ाकर 350 करना है।

हवाई यातायात की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारतीय विमानन कंपनियां अपने बेड़े का विस्तार कर रही हैं और लगभग 1,700 विमानों के ऑर्डर दिए जा चुके हैं।

मंत्री के कार्यालय द्वारा शुक्रवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, ‘रणनीतिक संवाद और नीतिगत प्रस्तुतियों के माध्यम से मंत्री ने भारत के तेजी से बढ़ते विमानन क्षेत्र, सुधार-आधारित परिवेश और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।’

दावोस में एयरबस और बोइंग के अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकों में नायडू ने भारत में विमानों के कल-पुर्जे बनाने और मरम्मत केंद्रों (एमआरओ) की स्थापना की वकालत की।

साथ ही, उन्होंने पर्यटन, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और क्षेत्रीय संपर्क के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं के विस्तार हेतु सहयोग मांगा।

यूरोपीय संघ के परिवहन आयुक्त एपोस्टोलोस जित्जिकोस्तास के साथ अपनी बैठक में नायडू ने टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार विमानन क्षेत्र में सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस दौरान ‘पर्यावरण अनुकूल विमानन ईंधन’ (एसएएफ) के लिए तकनीकी सहयोग के साथ-साथ विमानन सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और ड्रोन नियमों पर नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) और यूरोपीय विमानन सुरक्षा एजेंसी (ईएएसए) के बीच नियामक सहयोग मजबूत करने पर चर्चा हुई।

वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ बातचीत के दौरान, मंत्री का ध्यान हवाई अड्डों पर यात्रियों की निर्बाध आवाजाही के लिए ‘डिजीयात्रा’ के विस्तार और कृत्रिम मेधा-आधारित समाधानों पर रहा।

विज्ञप्ति में कहा गया, ‘भारत पवेलियन में मंत्री ने विस्तृत ग्राफिक्स और प्रस्तुतिकरण के माध्यम से भारत के विमानन क्षेत्र में आए बदलावों को प्रदर्शित किया, जिसमें वैश्विक प्रतिनिधियों ने गहरी रुचि दिखाई।’

भाषा सुमित रमण

रमण


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