सुभाष चंद्रा की याचिका पर एनसीएलएटी का ऋणदाताओं को नोटिस, अगली सुनवाई 29-30 अक्टूबर को

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सुभाष चंद्रा की याचिका पर एनसीएलएटी का ऋणदाताओं को नोटिस, अगली सुनवाई 29-30 अक्टूबर को

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  • Publish Date - September 29, 2026 / 03:01 PM IST,
    Updated On - September 29, 2026 / 03:01 PM IST

नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने एस्सेल समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा द्वारा दायर एक याचिका पर मंगलवार को ऋणदाताओं को नोटिस जारी किए और मामले की सुनवाई के लिए 29 और 30 अक्टूबर की तारीख तय की।

चंद्रा ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की पांच सदस्यीय वृहद पीठ द्वारा एक सितंबर को पारित उस आदेश को अपीलीय न्यायाधिकरण में चुनौती दी थी, जिसने उनके व्यक्तिगत दिवाला मामले में तीसरे (टाई-ब्रेकर) न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगा दी थी और उन्हें अपनी संपत्तियों को अलग करने या बेचने से रोक दिया था।

एनसीएलएटी ने ऋणदाताओं को एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

एनसीएलएटी की तीन सदस्यीय पीठ ने सुभाष चंद्रा को भी ऋणदाताओं के जवाब पर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया।

कार्यवाहक चेयरपर्सन न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) योगेश खन्ना और तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा तथा अजय दास मेहरोत्रा की पीठ ने कहा, ‘‘नोटिस जारी किया जाए… (विचारणीयता और स्थगन पर) एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल किया जाएगा।’’

इस बीच, कुछ ऋणदाताओं की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर अपीलीय न्यायाधिकरण ने ऋणदाताओं द्वारा दायर एक अलग याचिका को चंद्रा की अपील के साथ जोड़ दिया। इस याचिका में एनसीएलटी के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें लगभग 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के निपटान के लिए करीब 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान को मंजूरी दी गई थी।

एनसीएलएटी ने चंद्रा की अंतरिम राहत याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 29 और 30 अक्टूबर की तारीख तय की। न्यायाधिकरण ने संकेत दिया कि एक दिन चंद्रा की ओर से दलीलों के लिए और दूसरा दिन ऋणदाताओं की दलीलों के लिए आवंटित किया जाएगा।

कार्यवाही के दौरान सॉलिसिटर जनरल मेहता ने 19 नवंबर को होने वाली एनसीएलटी की पांच सदस्यीय पीठ की अगली सुनवाई के नतीजे की प्रतीक्षा करने का सुझाव दिया। हालांकि, सुभाष चंद्रा का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता ने इसका विरोध किया।

भाषा पाण्डेय अजय

अजय