नई जीडीपी श्रृंखला संरचनात्मक बदलावों के अनुरूप, सर्वोत्तम वैश्विक मानकों पर आधारित: एन के सिंह

Ads

नई जीडीपी श्रृंखला संरचनात्मक बदलावों के अनुरूप, सर्वोत्तम वैश्विक मानकों पर आधारित: एन के सिंह

  •  
  • Publish Date - September 3, 2026 / 03:03 PM IST,
    Updated On - September 3, 2026 / 03:03 PM IST

नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) पंद्रहवें वित्त आयोग के चेयरमैन रह चुके एन के सिंह ने बृहस्पतिवार को नई जीडीपी श्रृंखला के आधार पर जारी आंकड़ों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा भारत की अर्थव्यवस्था में आए महत्वपूर्ण बदलावों, विशेषकर सेवा क्षेत्र के तेजी से विस्तार को बेहतर ढंग से बताता है।

सिंह ने कहा कि नई श्रृंखला सर्वोत्तम वैश्विक मानकों के अनुरूप है।

सिंह ने यह भी कहा कि 38 साल बाद भारत को ‘ए’ ‘रेटिंग’ मिली है। यह 2014 से केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के व्यापक संरचनात्मक सुधारों और लगातार बनी व्यापक आर्थिक स्थिरता को अभिव्यक्त करती है।

जापान क्रेडिट रेटिंग (जेसीआर) एजेंसी ने बुधवार को स्थिर परिदृश्य के साथ भारत की रेटिंग को ‘बीबीबी+’ से बढ़ाकर ‘ए-’ कर दिया। जेसीआर ने भारत की ‘मजबूत’ आर्थिक वृद्धि, वित्तीय स्थिति में सुधार और वृद्धि की बुनियाद मजबूत करने वाली आर्थिक नीतियों की दक्षता के आधार पर रेटिंग बढ़ाई है।

सिंह ने कहा कि 2022-23 को आधार वर्ष बनाकर तैयार की गई नई जीडीपी श्रृंखला में पहले की तुलना में अधिक आंकड़ों और आर्थिक गतिविधियों को शामिल किया गया है। राष्ट्रीय आय की गणना के लिए आधार वर्ष में बदलाव एक सामान्य प्रक्रिया है।

राष्ट्रीय आय की गणना के लिए आधार वर्ष को 2011-12 से बढ़ाकर 2022-23 कर दिया गया है।

उन्होंने 10वें सीआईआई राष्ट्रीय स्कूल शिक्षा शिखर सम्मेलन के दौरान अलग से बातचीत में कहा, ‘‘देश आर्थिक गतिविधियों की बदलती वास्तविकताओं और उनके स्वरूप को प्रतिबिंबित करने के लिए आधार वर्ष बदलते हैं। भारत में सेवा क्षेत्र में बहुत बड़ा बदलाव आया है और जीडीपी की संरचना में भी व्यापक परिवर्तन हुआ है। नई श्रृंखला इन बदलावों को बेहतर ढंग से बताती है। यह सर्वोत्तम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।’’

जीडीपी वृद्धि दर जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत रही है। आंकड़े जारी होने के बाद कुछ आलोचकों ने इसकी विश्वसनीयता और गणना पद्धति पर सवाल उठाए हैं। यह वृद्धि बाजार के अनुमानों से ही नहीं बल्कि आरबीआई के सात प्रतिशत के अनुमान से भी काफी अधिक रही है।

सरकार पहले ही इन आलोचनाओं को खारिज कर चुकी है। उसने कहा है कि पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़ों की तुलना नई श्रृंखला में किए गए संशोधनों के संदर्भ में की जानी चाहिए।

भारत की रेटिंग को लेकर सिंह ने कहा कि जेसीआर ने यह साख ऐसे समय बढ़ाई है, जब भारतीय अर्थव्यवस्था ने जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। मार्च तिमाही में वृद्धि दर 8.6 प्रतिशत और पिछले साल जून तिमाही में 6.9 प्रतिशत रही थी।

उन्होंने कहा, ‘‘रेटिंग का बढ़ना मोदी सरकार के 2014 से किए गए व्यापक संरचनात्मक सुधारों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि भारत को आखिरी बार ‘ए’ श्रेणी की रेटिंग 1988 में मिली थी, लेकिन 1990-91 के भुगतान संतुलन संकट के दौरान हमने इसे गंवा दिया। इसके बाद किए गए बदलाव इतने पर्याप्त नहीं थे कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसी को रेटिंग बढ़ाने के लिए आश्वस्त कर सकें…।’’

सिंह ने कहा, ‘‘2026 में भारत को फिर से ‘ए’ श्रेणी में जगह मिलना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह संरचनात्मक बदलावों तथा निरंतर व्यापक आर्थिक स्थिरता के बीच बने तालमेल को बताता है। यह बदलाव के एक महत्वपूर्ण दौर का प्रतीक है।’’

भारत को 1988 में मूडीज ने ‘ए2’ रेटिंग दी थी। 1990-91 के भुगतान संतुलन संकट के दौरान रेटिंग में गिरावट आई थी।

भाषा रमण अजय

अजय