(4D Printing Technology/ Image Credit: Pexels)
4D Printing Technology: 3D प्रिंटिंग के बाद अब 4D प्रिंटिंग को भविष्य (4D Printing Technology) की नई तकनीक के तौर पर देखा जा रहा है। इसकी खासियत यह है कि इससे तैयार की गई वस्तुएं सिर्फ एक तय आकार में स्थिर नहीं रहतीं बल्कि वातावरण के अनुसार अपना रूप बदल सकती है। 4D प्रिंटिंग में स्मार्ट मटीरियल का इस्तेमाल होता है जो तापमान, नमी, पानी, रोशनी, चुंबकीय क्षेत्र या पीएच में बदलाव होने पर प्रतिक्रिया देता है। मेडिकल, एयरोस्पेस और दूसरी इंडस्ट्री में इसके इस्तेमाल की संभावनाओं पर तेजी से रिसर्च हो रही है।
सामान्य 3D प्रिंटिंग में कम्प्यूटर डिजाइन के आधार पर मटीरियल की कई परतें जोड़कर कोई वस्तु तैयार की जाती है। वस्तु बनने के बाद उसका आकार सामान्य तौर पर वैसा ही रहता है। वहीं 4D प्रिंटिंग में ऐसे स्मार्ट मटीरियल (4D Printing Technology) लगाए जाते हैं जिन्हें पहले से इस तरह तैयार किया जाता है कि खास परिस्थितियों में वे अपना आकार बदल सकें। यानी इसमें वस्तु का शुरुआती डिजाइन ही नहीं, बल्कि भविष्य में उसका व्यवहार भी तय किया जाता है।
4D प्रिंटिंग की सबसे बड़ी ताकत इसके स्मार्ट मटीरियल हैं। इनमें शेप-मेमोरी पॉलिमर शामिल हैं जो गर्मी मिलने पर अपने पहले से तय आकार में वापस आ सकते हैं। हाइड्रोजेल पानी के संपर्क में आने पर फूल या सिकुड़ सकते हैं। इसके अलावा लिक्विड-क्रिस्टल इलास्टोमर और सेल्फ-हीलिंग पॉलिमर जैसे मटीरियल पर भी काम चल रहा है। इनसे हल्के, लचीले और परिस्थिति के अनुसार प्रतिक्रिया करने वाले प्रोडक्ट बनाए जा सकते हैं।
मेडिकल क्षेत्र में 4D प्रिंटिंग की मदद से ऐसे इंप्लांट (4D Printing Technology) तैयार करने की संभावना है जो शरीर के अंदर पहुंचने के बाद अपने आकार में बदलाव कर सकें। टारगेटेड ड्रग डिलीवरी में भी इसका इस्तेमाल हो सकता है। जिससे दवा को जरूरत वाली जगह तक पहुंचाना आसान हो। एयरोस्पेस में ऐसी वस्तुएं तैयार की जा सकती हैं, जो लॉन्च के समय छोटी रहें और अंतरिक्ष में पहुंचकर अपने आप फैलकर बड़े एंटीना या सोलर पैनल का रूप ले लें।
4D प्रिंटिंग को लेकर संभावनाएं काफी बड़ी हैं। लेकिन यह अभी पूरी तरह व्यावसायिक उत्पादन के लिए तैयार नहीं हुई है। फिलहाल इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से रिसर्च और प्रोटोटाइप बनाने में हो रहा है। स्मार्ट मटीरियल की मजबूती, लंबे समय तक टिकाऊपन और सही गति से आकार बदलने जैसी चुनौतियों पर काम जारी है। इसलिए 4D प्रिंटिंग को फिलहाल 3D का विकल्प मानने के बजाय उसकी अगली तकनीकी दिशा के रूप में देखा जा रहा है।