एनएचएआई पर्यावणीय चुनौतियों का दबाव कम करने के लिए ‘मधुमक्खी गलियारे’ बनाएगा

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एनएचएआई पर्यावणीय चुनौतियों का दबाव कम करने के लिए ‘मधुमक्खी गलियारे’ बनाएगा

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  • Publish Date - February 17, 2026 / 08:56 PM IST,
    Updated On - February 17, 2026 / 08:56 PM IST

नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) देश में पर्यावरण संबंधी चुनौतियों को कम करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे मधुमक्खी कॉरिडोर (गलियारा) बनाएगा। मंगलवार को एक सरकारी बयान में यह जानकारी दी गई है।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने कहा कि अगले वित्त वर्ष में कम से कम तीन ऐसे गलियारे बनने की उम्मीद है।

मधुमक्खीपालन उद्योग महासंघ (सीएआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष, देवव्रत शर्मा ने केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी की इस घोषणा का स्वागत किया और कहा कि इस पहल से सीएआई की वर्षो पुरानी मांग पूरी हुई है।

उन्होंने कहा कि इस पहल के संबंध में केन्द्रीय मंत्री को उन्होंने चार-पांच वर्ष पहले प्रतिवेदन दिया था और इसके बारे में विस्तार से चर्चा की थी। उस समय (वर्ष 2019-21) नितिन गडकरी सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय का कार्यभार भी संभाल रहे थे।

मंत्रालय ने कहा कि मधुमक्खी कॉरिडोर में मधुमक्खियों के लिए सही पेड़-पौधों का एक लगातार सीधी कतार होगी, जिसमें फूल वाले पेड़ और पौधे होंगे, जो पूरे साल पुष्प रस (नेक्टर) और परागकण से बनने वाले पॉलेन की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे।

एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे पौधों में पर-परागण को अंजाम देने वाले (पॉलिनेटर) या मधुमक्खी कॉरिडोर बनाने के लिए अपनी तरह की पहली पहल की घोषणा की है।

मंत्रालय ने कहा कि ‘मधुमक्खी कॉरिडोर’ पहल मधुमक्खियों और दूसरे ‘पॉलिनेटर्स’ पर बढ़ती पर्यावणीय चुनौतियों को कम करने में मदद करेगी, जो पर-परागण सेवा, खेती और बागवानी की उत्पादकता और पूरे पारिस्थिकी संतुलन पर बुरा असर डाल रहा है।

ये कॉरिडोर, राष्ट्रीय राजमार्ग के हिस्सों और एनएचएआई की दूसरी खाली ज़मीनों पर बनाए जाएंगे, जो खेती-बाड़ी के मौसम और स्थानीय हालात पर निर्भर करेगा। देश भर में एनएचएआई के ‘फील्ड ऑफिस’ राष्ट्रीय राजमार्ग के उन हिस्सों की पहचान करेंगे जहां लगभग 500 मीटर से एक किमी के खाली स्थान पर फूलों वाले पेड़ों के झुंड लगाए जा सकते हैं, जो मधुमक्खियों और जंगली मधुमक्खियों के खाने की औसत दूरी के हिसाब से है।

एनएचएआई के ‘फील्ड ऑफिस’ वर्ष 2026-27 के दौरान कम से कम तीन पॉलिनेटर कॉरिडोर की योजना बनायेंगे और उन्हें विकसित भी करेंगे। एनएचएआई की योजना साल 2026-27 के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे लगभग 40 लाख पेड़ लगाने का है, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत पेड़ ‘मधुमक्खी कॉरिडोर’ पहल के तहत लगाए जाएंगे।

‘मधुमक्खी कॉरिडोर’ पहल पारस्थितिकी नतीजों को बेहतर बनाने, पॉलिनेटर के बचाव में मदद करने और पर्यावरण के लिए ज़िम्मेदार राष्ट्रीय राजमार्ग विकास के लिए एनएचएआई की प्रतिबद्धता को और मज़बूत करने में मदद करेगी।

बयान में, मंत्रालय ने उन खास राजमार्गो से जुड़ी कोई और जानकारी साझा नहीं की जिनके साथ कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय