नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) नीति आयोग ने आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए सरकार से वैश्विक आयुर्वेद पंजी (जीएआर) बनाने और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की सिफारिश की है।
आयोग ने ‘आयुर्वेद को वैश्विक बनाने के लिए रणनीतिक रूपरेखा’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में विश्व आयुर्वेद एवं योग महासंघ की स्थापना तथा आयुर्वेदिक फार्माकोपिया-निर्यात संस्करण तैयार करने का भी सुझाव दिया है।
आयोग ने कहा, ‘‘सरकार को आयुर्वेद व्यापार से संबंधित डैशबोर्ड भी विकसित करना चाहिए।’’
नीति आयोग ने आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय बढ़ाने की भी सिफारिश की है।
रिपोर्ट के अनुसार, आयुर्वेद भारत में पारंपरिक चिकित्सा की एक मान्यता प्राप्त और विनियमित प्रणाली है। देश में 3,55,000 से अधिक प्रशिक्षित आयुर्वेद चिकित्सक हैं, लेकिन इनमें से लगभग 95 प्रतिशत भारत में ही कार्यरत हैं और विदेशों में इनकी उपस्थिति सीमित है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्यात लगभग 150 देशों को किया जा रहा है। इन उत्पादों का निर्यात वर्ष 2014 के 1.09 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2023 में 2.16 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है।
भाषा यासिर अजय
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