होर्मुज जलडमरूमध्य से आने के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं: अधिकारी
होर्मुज जलडमरूमध्य से आने के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं: अधिकारी
नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) तेल समृद्ध फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ने वाले एकमात्र समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए किसी भी देश की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को यह बात कही।
फारस की खाड़ी में फंसे भारतीय जहाजों को ईरान के साथ किसी तरह के समझौते पर पहुंचने के बाद ही जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दिए जाने की चर्चाओं को खारिज करते हुए, बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि जलडमरूमध्य से आवागमन पोत परिवहन कंपनियों और उनकी अनुबंधित इकाइयों द्वारा सुरक्षा और अन्य स्थितियों पर विचार करने के बाद किया जाता है।
ईरान पर अमेरिकी और इजरायल के हमलों और उसकी जवाबी कार्रवाई के कारण जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई थी।
सिंह ने कहा, ‘‘होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं है।’’
उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय नौवहन नियमों के अनुसार जलडमरूमध्य में आवागमन की स्वतंत्रता है। चूंकि जलडमरूमध्य संकरा है, केवल प्रवेश और निकासी मार्ग चिन्हित हैं, जिनका पालन सभी जहाजों को करना आवश्यक है।
एलपीजी टैंकर पाइन गैस और जग वसंत जलडमरूमध्य को पार करने से पहले सोमवार सुबह फारस की खाड़ी से रवाना हुए। दोनों एक-दूसरे के करीब चल रहे हैं। इन जहाजों पर लदी गैस देश में लगभग एक दिन की खाना पकाने की गैस की खपत के बराबर है। जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने से जुड़े आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
हाल ही में दो और भारतीय ध्वज वाले एलपीजी जहाज युद्ध प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। ये जहाज लगभग एक दिन का देश का गैस भंडार लेकर आ रहे हैं। पाइन गैस जहाज में 45,000 टन एलपीजी है और यह 27 मार्च को न्यू मंगलौर बंदरगाह पहुंचने वाला है।
जग वसंत जहाज में 47,612 टन एलपीजी है और यह 26 मार्च को गुजरात के कांडला पहुंचेगा।
इन दोनों जहाजों में क्रमशः 33 और 27 भारतीय नाविक सवार हैं।
ये दोनों जहाज उन 22 भारतीय झंडे वाले जहाज में शामिल हैं जो पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद फारस की खाड़ी में फंस गए थे। इसका कारण युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य का लगभग बंद होना है।
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच का संकरा जलमार्ग है जो तेल और गैस उत्पादक खाड़ी देशों को शेष विश्व से जोड़ता है।
इससे पहले, लगभग 92,712 टन एलपीजी ला रहे एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी सुरक्षित रूप से भारतीय तट पर पहुंच चुके हैं। यह देश की लगभग एक दिन की खाना पकाने की गैस की खपत के बराबर है।
अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले और ईरान के पलटवार के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। उस समय होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय ध्वज वाले 28 भारतीय जहाज मौजूद थे। इनमें से 24 जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में और चार पूर्वी हिस्से में थे। पिछले कुछ दिन में, दोनों तरफ से दो-दो जहाज सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य तक पहुंचने में सफल रहे हैं।
एलपीजी ला रहा जहाज शिवालिक 16 मार्च को गुजरात के मुंदड़ा बंदरगाह पहुंचा। वहीं एक अन्य एलपीजी टैंकर नंदा देवी, अगले दिन गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंचा। दोनों एलपीजी वाहक जहाजों ने 13 मार्च को अपनी यात्रा शुरू की थी और 14 मार्च की सुबह होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया था।
संयुक्त अरब अमीरात से 80,886 टन कच्चे तेल से लदा भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर जग लाडकी 18 मार्च को मुंदड़ा बंदरगाह पहुंचा था। एक अन्य टैंकर, जग प्रकाश जो तंजानिया जा रहा था, पहले ही सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य को पार कर चुका है। यह ओमान से अफ्रीका के लिए गैसोलीन ले जा रहा था।
युद्ध क्षेत्र में बचे हुए 22 भारतीय ध्वज वाले जहाजों में से 20 जलडमरूमध्य के पश्चिमी किनारे पर हैं, जिनमें 540 नाविक सवार हैं, जबकि दो पूर्वी किनारे पर हैं।
उन्होंने बताया कि जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में फंसे जहाजों में एलपीजी के पांच जहाज शामिल हैं, जिनमें लगभग 2.3 लाख टन रसोई गैस है और इसके अलावा एक खाली जहाज में एलपीजी भरना शुरू कर दिया गया है।
इसके अलावा, एक एलएनजी टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक रासायनिक उत्पादों का परिवहन करने वाला टैंकर, तीन कंटेनर जहाज, दो बल्क कैरियर और तीन अन्य जहाज नियमित रखरखाव के लिए ड्राई डॉक में थे।
उन्होंने बताया कि जबकि एलएनजी जहाज पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड द्वारा चार्टर किया गया है। एलपीजी जहाजों को मुख्य रूप से पेट्रोलियम विपणन कंपनियों, जैसे कि भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने किराये पर लिया है। कच्चे तेल के टैंकर इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और बीजीएन इंटरनेशनल द्वारा लिए गए हैं।
कुल मिलाकर, लगभग 500 टैंकर पोत फारस (अरब) की खाड़ी में ही फंसे हुए हैं। इनमें 108 कच्चे तेल के टैंकर, 166 तेल उत्पाद टैंकर, 104 रसायन/उत्पाद टैंकर, 52 रासायनिक टैंकर और 53 अन्य प्रकार के टैंकर शामिल हैं।
एलपीजी का लगभग 85-95 प्रतिशत और गैस का 30 प्रतिशत इसी जलडमरूमध्य से आता है। हालांकि, कच्चे तेल की आपूर्ति में आई रुकावट की भरपाई रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और लातिनी अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आंशिक रूप से की गई है, लेकिन औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को गैस और एलपीजी की आपूर्ति में कटौती हुई है।
भाषा योगेश अजय
अजय

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