नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) सरकार ने तीन लाख रुपये तक मूल्य वाले निर्यात पर पंजीकरण-सह-सदस्यता प्रमाणपत्र (आरसीएमसी) की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। इस कदम का उद्देश्य नए और छोटे निर्यातकों पर अनुपालन का बोझ कम करना है।
वाणिज्य मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि इस फैसले से डाक, कूरियर और अन्य उभरते माध्यमों से भी निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
पंजीकरण-सह-सदस्यता प्रमाणपत्र निर्यात संवर्धन परिषद या संबंधित जिंस बोर्ड जारी करता है। यह प्रमाणपत्र आमतौर पर यह साबित करता है कि निर्यातक संबंधित निर्यात संगठन के साथ पंजीकृत है।
अबतक नए या कभी-कभार कम मूल्य का सामान निर्यात करने वालों को पहले संबंधित पंजीकरण संस्था की पहचान करनी पड़ती थी, जरूरी दस्तावेज जमा करने होते थे और निर्यात शुरू करने से पहले पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करनी होती थी। इससे उन पर अतिरिक्त अनुपालन का बोझ पड़ता था।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘डीजीएफटी ने विदेश व्यापार नीति, 2023 में संशोधन किया है। इसके तहत अब तीन लाख रुपये तक एफओबी (जहाज पर लदान कीमत) मूल्य वाली निर्यात खेप के लिए आरसीएमसी या पंजीकरण प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं होगी, जबकि पहले यह अनिवार्य था।’’
हालांकि, तीन लाख रुपये से अधिक मूल्य वाले निर्यात माल के लिए वैध आरसीएमसी की जरूरत बनी रहेगी।
वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के आंकड़ों से पता चलता है कि तीन लाख रुपये तक के निर्यात माल की खेपों की संख्या कुल निर्यात दस्तावेजों में 43 प्रतिशत है, लेकिन कुल वस्तु निर्यात मूल्य में इनकी हिस्सेदारी केवल 0.86 प्रतिशत है।
मंत्रालय ने कहा कि इस छूट से बड़ी संख्या में छोटे मूल्य के निर्यात लेनदेन को लाभ मिलेगा, जबकि कुल निर्यात मूल्य पर इसका असर मामूली रहेगा।
इससे सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), कारीगरों, छोटे कारोबारियों और पहली बार निर्यात करने वालों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश आसान होगा। वे कम शुरुआती अनुपालन के साथ विदेशी बाजारों में अपने उत्पाद भेज सकेंगे।
भाषा रमण अजय
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