एनटीपीसी प्रमुख ने परमाणु प्रौद्योगिकी के लिए एक आपूतिकर्ता पर निर्भरता को लेकर आगाह किया
एनटीपीसी प्रमुख ने परमाणु प्रौद्योगिकी के लिए एक आपूतिकर्ता पर निर्भरता को लेकर आगाह किया
नयी दिल्ली, 17 मई (भाषा) देश को 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते समय किसी एक देश या आपूर्तिकर्ता पर अत्यधिक निर्भरता से बचना होगा।
एनटीपीसी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक गुरदीप सिंह ने आगाह करते हुए कहा कि भारत को परमाणु प्रौद्योगिकी और संसाधनों पर अपना नियंत्रण मजबूत रखना चाहिए।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) द्वारा आयोजित कार्यशाला के ब्योरे के मुताबिक, सिंह ने कहा कि शुरुआती चरण में यदि स्वदेशी विकल्प 5-10 प्रतिशत महंगे भी हों, तब भी देश को उन्हें प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि वैश्विक स्तर पर दिख रही आपूर्ति शृंखला संबंधी कमजोरियों से बचा जा सके।
यह कार्यशाला पिछले महीने “शांति अधिनियम, 2025 : सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से भारत की 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा रूपरेखा को सक्षम बनाना” विषय पर आयोजित की गई थी।
देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी के प्रमुख सिंह ने कहा कि केवल विधायी बदलाव पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि नियमों और दिशानिर्देशों को जल्द अंतिम रूप देना भी जरूरी है। उनका कहना था कि स्पष्ट कार्यान्वयन व्यवस्था के बिना नीतियों को वास्तविक निवेश में बदलना संभव नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि भारत को किसी एक देश या आपूर्तिकर्ता पर तकनीकी निर्भरता से बचना चाहिए और दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए घरेलू क्षमता निर्माण पर जोर देना चाहिए।
एनटीपीसी प्रमुख ने बताया कि उनकी कंपनी वर्ष 2047 तक 30 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए कंपनी देश के 14 राज्यों में उपयुक्त स्थल की पहचान कर रही है।
उन्होंने कहा कि एनटीपीसी जैसे बड़े बिजली उत्पादक के लिए बड़ी क्षमता वाले रिएक्टर अधिक उपयुक्त हैं। उनके अनुसार, स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) औद्योगिक इकाइयों की सीमित या अपनी जरूरतों के लिए बेहतर हो सकते हैं।
एनटीपीसी की वेबसाइट के अनुसार, कंपनी की समूह स्तर पर कुल स्थापित क्षमता 89,805.30 मेगावाट है, जिसमें कोयला, गैस, जलविद्युत और सौर ऊर्जा परियोजनाएं शामिल हैं। 31 मार्च, 2026 तक भारत की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता में एनटीपीसी की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत रही, जबकि कुल बिजली उत्पादन में उसका योगदान 24 प्रतिशत था।
भाषा अजय अजय योगेश
अजय

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