पश्चिम एशिया युद्ध के असर से तेल-तिलहन कीमतों में मजबूती जारी

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पश्चिम एशिया युद्ध के असर से तेल-तिलहन कीमतों में मजबूती जारी

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  • Publish Date - March 20, 2026 / 09:21 PM IST,
    Updated On - March 20, 2026 / 09:21 PM IST

नयी दिल्ली, 20 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच देश के तेल-तिलहन बाजार में शुक्रवार को मूंगफली तेल-तिलहन को छोड़कर बाकी अन्य तेल-तिलहनों के दाम मजबूत रहे तथा सरसों एवं सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल के दाम मजबूत हुए। मंहगा होने की वजह से लिवाली कुछ कमजोर पड़ने के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम स्थिर बने रहे।

शिकॉगो एक्सचेंज में लगभग एक प्रतिशत की तेजी है। मलेशिया एक्सचेंज में कारोबार आज बंद है।

बाजार सूत्रों ने कहा कि पश्चिम एशिया के तनाव के कारण विशेषकर सोयाबीन डीगम की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये टूटकर अपने रिकॉर्ड निम्नतम स्तर पर पहुंच गया है। रुपया कमजोर होने से आयात मंहगा हुआ है। बाजार में कम आपूर्ति की स्थिति है जिसके जल्दी दुरुस्त होने की संभावना कम है। इन सब परिस्थितियों के बीच अधिकांश खाद्य तेल-तिलहनों के दाम में मजबूती रही।

उन्होंने कहा कि मंहगा होने की वजह से लिवाली कुछ कमजोर रहने के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम स्थिर रहे। इसके अलावा बिनौला तेल का दाम मूंगफली तेल से सस्ता होने के कारण ग्राहक बिनौला तेल का अधिक उपयोग कर रहे हैं। वैसे मूंगफली की आगे मांग बनी रहेगी और आपूर्ति दिक्कतों को देखते हुए सरकार को इसका स्टॉक रखने की जरुरत है।

इसी प्रकार, सरसों और सोयाबीन का भी स्टॉक रखने की जरुरत है। युद्ध आज रुक भी जाये तो ‘शार्ट सप्लाई’ की स्थिति जल्दी नहीं खत्म होगी क्योंकि विशेषकर सोयाबीन डीगम तेल के शिकागो में लदान होने, यात्रा में लगने वाला समय और देश के बंदरगाह पर माल उतारने में लगभग दो महीने का समय लगता है। इसके इतर, युद्ध के कारण आयात का मालभाड़ा भी करीब छह रुपये प्रति किलो बढ़ गया है।

सूत्रों ने कहा कि वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ने के बीच विदेशी पूंजी की सतत निकासी और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल से रुपये पर दबाव है जो डॉलर के मुकाबले शुक्रवार को 64 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ अब तक के सबसे निचले स्तर 93.53 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

उन्होंने कहा कि सरसों का तेल आयातित तेल सोयाबीन डीगम से शुक्रवार को 10-15 रुपये प्रति किलो सस्ता हो गया है। इस कारण सरसों के साथ-साथ पामोलीन तेल की बाजार में मांग बढ़ रही है। कुछ समय पहले सरसों का तेल सोयाबीन डीगम तेल से अच्छा खासा ऊंचा बना हुआ था।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 6,950-6,975 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 7,250-7,725 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 17,550 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,770-3,070 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 14,600 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,430-2,530 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,430-2,575 रुपये प्रति टिन।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 16,300 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 15,700 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 13,200 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 13,600 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 14,700 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 15,400 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 14,350 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 5,700-5,750 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 5,300-5,450 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण