ओएनजीसी मंगलुरु में 17.5 लाख टन पेट्रोलियम का रणनीतिक भंडार विकसित करेगी

ओएनजीसी मंगलुरु में 17.5 लाख टन पेट्रोलियम का रणनीतिक भंडार विकसित करेगी

ओएनजीसी मंगलुरु में 17.5 लाख टन पेट्रोलियम का रणनीतिक भंडार विकसित करेगी
Modified Date: July 10, 2026 / 04:32 pm IST
Published Date: July 10, 2026 4:32 pm IST

नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनी ओएनजीसी ने शुक्रवार को कहा कि उसके निदेशक मंडल ने मंगलुरु में 17.5 लाख टन की रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण क्षमता विकसित करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इससे जिससे देश की आपातकालीन कच्चा तेल भंडारण क्षमता बढ़ेगी।

ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन लिमिटेड (ओएनजीसी) ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि यह परियोजना संबंधित अवसंरचना के साथ मंगलुरु स्थित ‘रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार’ (एसपीआर) के पहले चरण के विस्तार के रूप में विकसित की जाएगी।

हालांकि ओएनजीसी ने इस परियोजना की लागत और समयसीमा का खुलासा नहीं किया है।

साथ ही, निदेशक मंडल ने कंपनी को इस सुविधा के वाणिज्यिक उपयोग के विस्तार के लिए केंद्र सरकार के साथ बातचीत करने की भी अनुमति दी है, जो आवश्यक नियामकीय समर्थन के अधीन होगा।

भारत का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार कार्यक्रम देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था, जिसके तहत आपात स्थिति, आपूर्ति में बाधा या वैश्विक तेल कीमतों में तेज वृद्धि के दौरान उपयोग के लिए कच्चे तेल का भंडारण किया जाता है।

रणनीतिक भंडार, तेल विपणन कंपनियों और रिफाइनरियों द्वारा रखे जाने वाले परिचालन भंडार से अलग होता है।

एसपीआर कार्यक्रम के पहले चरण में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम और कर्नाटक के मंगलुरु एवं पादुर में भूमिगत चट्टानी गुफाओं में कुल मिलाकर लगभग 53.3 लाख टन क्षमता का भंडार तैयार किया गया है। इन इकाइयों का संचालन इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (आईएसपीआरएल) द्वारा किया जाता है, जो तेल उद्योग विकास बोर्ड के अधीन एक विशेष प्रयोजन इकाई है।

सरकार ने इस कार्यक्रम के दूसरे चरण को भी मंजूरी दी है, जिसमें पादुर इकाई का विस्तार और ओडिशा के चांदीखोल में एक नए रणनीतिक भंडार का विकास शामिल है, जिससे देश की आपातकालीन कच्चा तेल भंडारण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक एवं उपभोक्ता देश भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक तेल आयात करता है। ऐसे में वैश्विक तनाव और वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सामरिक भंडार देश की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा है।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण


लेखक के बारे में