नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) केईपी इंजीनियरिंग सर्विसेज ने शुक्रवार को कहा कि उसके एकीकृत अपशिष्ट जल प्रबंधन समाधान उद्योगों को 90-95 प्रतिशत तक अपशिष्ट जल पुनः प्राप्त करने में सक्षम बनाते है। इससे ताजे पानी पर निर्भरता कम होगी और परिचालन दक्षता बढ़ेगी।
हैदराबाद स्थित कंपनी ने बयान में कहा कि उसके समाधान में ‘एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट’, ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम’, ‘मल्टी-इफेक्ट इवेपोरेटर’ और ‘कंडेनसेट इंटीग्रेटेड गैस रिकवरी’ शामिल हैं। इनके जरिये उद्योग अपनी करीब सभी प्रक्रिया और उपयोगिता जल का उपचार एवं पुनर्चक्रण (रिसाइकल) कर सकते हैं।
कंपनी के अनुसार, इन प्रणालियों के जरिये उपचारित पानी को कूलिंग टावर, उपयोगिताओं और अन्य गैर-पेय अनुप्रयोगों में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
इससे औद्योगिक समूहों को लगभग सभी प्रक्रिया और उपयोग के पानी का उपचार और पुनर्चक्रण करने की सुविधा मिलती है।
केईपी इंजीनियरिंग पेट्रोरसायन, रसायन, खाद्य व दुग्ध, वस्त्र, खनन, धातु, मोटर वाहन, कागज, दवा, चीनी व ‘डिसैलिनेशन’ जैसे उद्योगों को सेवाएं देती है।
कंपनी के प्रबंध निदेशक मालू कांबले ने कहा, ‘‘ औद्योगिक तरल अपशिष्ट बोझ नहीं है बल्कि एक ऐसा संसाधन है जिसे सही तरीके से उपयोग में लाया जा सकता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ पानी की कमी इसलिए नहीं है क्योंकि वह अनुपलब्ध है; बल्कि इसलिए है क्योंकि जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है, वहां इसकी उपलब्धता सीमित है।’’
भारत में प्रतिदिन 72,00 करोड़ लीटर (एमएलडी) से अधिक ‘सीवेज’ उत्पन्न होता है। फिर भी इसका केवल लगभग 28 प्रतिशत ही उपचारित किया जाता है जिससे लगभग 72 प्रतिशत अनुपचारित रह जाता है।
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