वित्तीय संस्थानों में बीते वित्त वर्ष 48,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 10,000 से अधिक मामले दर्ज

वित्तीय संस्थानों में बीते वित्त वर्ष 48,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 10,000 से अधिक मामले दर्ज

वित्तीय संस्थानों में बीते वित्त वर्ष 48,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 10,000 से अधिक मामले दर्ज
Modified Date: May 29, 2026 / 03:05 pm IST
Published Date: May 29, 2026 3:05 pm IST

मुंबई, 29 मई (भाषा) बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों ने वित्त वर्ष 2025-26 में संयुक्त रूप से 48,021 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 10,114 मामले दर्ज किए जबकि 2024-25 में 32,803 करोड़ रुपये के 3,722 मामले सामने आए थे। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

आरबीआई की वित्त वर्ष 2025-26 पर जारी वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में बैंक धोखाधड़ी के मामलों के आकलन से पता चलता है कि सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बैंकों में धोखाधड़ी के मामले कम हुए हैं लेकिन इनमें शामिल राशि बढ़ गई है।

हालांकि 2023-24 और 2024-25 के दौरान कार्ड/इंटरनेट/डिजिटल भुगतान श्रेणी में धोखाधड़ी की संख्या सबसे अधिक थी। लेकिन 2025-26 में ‘एडवांस’ यानी कर्ज श्रेणी का हिस्सा सबसे बड़ा था।

मूल्य के हिसाब से, तीनों वर्षों में कर्ज श्रेणी में सबसे ज्यादा धोखाधड़ी दर्ज की गई।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने 2025-26 में धोखाधड़ी के मामलों की संख्या में वार्षिक आधार पर गिरावट दर्ज की, हालांकि धोखाधड़ी में शामिल राशि बढ़कर 35,709 करोड़ रुपये हो गई।

सरकारी बैंकों ने 2025-26 के दौरान 5,418 धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए, जो 2024-25 के 6,916 मामलों और 2023-24 के 7,446 मामलों से कम हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में इस तरह की धोखाधड़ी में शामिल राशि 2024-25 में 23,617 करोड़ रुपये और 2023-24 में 8,092 करोड़ रुपये थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, निजी क्षेत्र के बैंकों ने भी धोखाधड़ी के मामलों में गिरावट दर्ज की और यह 2025-26 में घटकर 3,956 रह गई। जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में यह संख्या 14,024 और 2023-24 में 23,965 थी।

निजी बैंकों में धोखाधड़ी की कुल राशि 2025-26 में 11,399 करोड़ रुपये रही, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 8,927 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2023-24 में 2,667 करोड़ रुपये थी।

विदेशी बैंकों ने 2025-26 के दौरान 290 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 210 मामले दर्ज किए, जबकि इससे पिछले वर्ष 2024-25 में 181 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 1,447 मामले दर्ज किए गए थे।

लघु वित्त बैंकों ने 2025-26 में 114 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 467 मामले दर्ज किए, जबकि भुगतान बैंकों ने 11 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 47 मामले दर्ज किए।

पिछले वित्त वर्ष में कर्ज श्रेणी में 40,774 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के कुल 8,640 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2024-25 के दौरान 30,367 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 7,924 मामले और 2023-24 के दौरान 8,917 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 4,105 मामले दर्ज किए गए थे।

आंकड़ों के अनुसार, कार्ड/ इंटरनेट/ डिजिटल भुगतान में धोखाधड़ी के 2025-26 में 293 मामले रहे, जिनमें 29 करोड़ रुपये की राशि शामिल है। यह संख्या 2024-25 में दर्ज 13,332 मामलों (517 करोड़ रुपये) और 2023-24 में दर्ज 28,836 मामलों (1,452 करोड़ रुपये) की तुलना में काफी कम है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह आंकड़े एक लाख रुपये और उससे अधिक की धोखाधड़ी के मामलों से संबंधित हैं, जो इस अवधि में दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा किसी वर्ष में दर्ज मामले वास्तव में कई वर्ष पहले भी घटित हो सकते हैं।

आरबीआई ने कहा कि 2025-26 के आंकड़ों में पिछले वित्त वर्षों से संबंधित 314 मामलों में 30,199 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले शामिल हैं, जिन्हें उच्चतम न्यायालय के मार्च 2023 के फैसले के बाद दोबारा जांच के बाद नए सिरे से दर्ज किया गया था।

भाषा रमण प्रेम

प्रेम


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