विदेशों में मजबूत रुख के बावजूद पाम-पामोलीन और सोयाबीन तेल के दाम स्थिर

विदेशों में मजबूत रुख के बावजूद पाम-पामोलीन और सोयाबीन तेल के दाम स्थिर

विदेशों में मजबूत रुख के बावजूद पाम-पामोलीन और सोयाबीन तेल के दाम स्थिर
Modified Date: May 15, 2026 / 09:27 pm IST
Published Date: May 15, 2026 9:27 pm IST

नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट, विदेशी एक्सचेंजों में सुधार के बावजूद आयातकों की लागत से नीचे दाम पर बिकवाली के कारण शुक्रवार को घरेलू बाजारों में सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल के दाम स्थिर बने रहे।

बाजार सूत्रों के अनुसार आयातित खाद्यतेलों के दाम स्थिर रहने के बीच सरसों तेल-तिलहन में भी स्थिरता बनी रही। दूसरी ओर, सबसे सस्ता होने के बाद मांग बढ़ने से मूंगफली तेल-तिलहन तथा बेहद कम उपलब्धता के बीच मांग बढ़ने से बिनौला तेल कीमतों में सुधार रहा। मध्य प्रदेश में सोयाबीन प्लांट वालों द्वारा दाम घटाने के बीच सोयाबीन तिलहन के दाम गिरावट के साथ बंद हुए।

दोपहर साढ़े तीन बजे मलेशिया एक्सचेंज सुधार के साथ बंद हुआ जबकि शिकागो एक्सचेंज में सुधार है।

सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एवं शिकागो एक्सचेंज में मजबूती रहने, डॉलर के मुकाबले रुपये के अपने निचले स्तर पर आने के बावजूद आयातकों की लागत से नीचे दाम पर बिक्री करने के कारण सोयाबीन एवं पाम-पामोलीन तेल जैसे आयातित खाद्यतेलों के दाम स्थिर बने रहे। इसके कारण बाजार धारणा प्रभावित रहने का असर सरसों तेल-तिलहन पर भी दिखा जिसके दाम स्थिर बने रहे।

उन्होंने कहा कि काफी लंबे समय से इस लागत से नीचे दाम की बिकवाली का सीधा संबंध विदेशीमुद्रा खर्च से है। खाद्यतेलों से मंहगाई बढ़ने का खतरा जिन समीक्षकों को पिछले दो दशकों से दिखता आ रहा था, उन्हें एक बार फिर से सोचना चाहिये कि उनकी चिंताओं के बावजूद आज विदेशीमुद्रा का खर्च कम हुआ है या निरंतर बढ़ता चला गया है। जबकि प्रत्येक घर में खाद्यतेल की प्रति व्यक्ति खपत दूध के मुकाबले काफी कम है। हाल के दिनों में अमूल और मदर डेयरी जैसी प्रमुख कंपनियों ने दूध के दाम बढ़ाये हैं लेकिन इनमें से किसी समीक्षक को दूध की मंहगाई पर चिंता जताते नहीं देखा गया।

सूत्रों ने कहा कि वर्ष 1987 में गुजरात में सूखे के दौरान आंध्र प्रदेश में मूंगफली की इतनी पैदावार की गई थी कि इसके तेल का दाम पहले के मुकाबले आधा रह गया था। इन्हीं दिनों में सरसों के उत्पादन के मामले में उत्तर प्रदेश राजस्थान से आगे था। अभी के उत्तराखंड के हल्द्वानी का सोयाबीन तेल बेहतरीन माना जाता था। लेकिन मंहगाई के हौव्वा खड़ा किये जाने और कुछ खास समीक्षकों की चिंताओं के बीच अपना घरेलू उत्पादन प्रभावित हुआ और इन तिलहनों की पैदावार कम होती चली गई।

उन्होंने कहा कि ‘सोपा’ (सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) जैसे देश के कुछ प्रमुख तेल संगठनों ने भी माना है खाद्यतेलों का मंहगाई पर खास असर नहीं होता। किसानों को जब जब अच्छे दाम मिले तो तिलहन का उत्पादन बढ़ने लगा। ऐसी मंहगाई का क्या रोना जो देश की विदेशीमुद्रा खर्च को निरंतर बढ़ाता चला जाये, उससे तुरंत निजात पाने की जरुरत है।

सूत्रों ने कहा कि गुजरात में सूरजमुखी से 5-6 रुपये किलो सस्ता होने के कारण मांग बढ़ने से मूंगफली तेल-तिलहन के दाम में सुधार आया। कम उपलब्धता के बीच मांग बढ़ने से बिनौला तेल में भी सुधार है। मध्य प्रदेश में सोयाबीन प्लांट द्वारा खरीद का दाम घटाने से सोयाबीन तिलहन में गिरावट है। वैसे बृहस्पतिवार के मुकाबले इस गिरावट के बावजूद सोयाबीन तिलहन के दाम एमएसपी से पर्याप्त अधिक हैं।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 7,100-7,125 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 6,525-7,000 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 15,500 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,470-2,770 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 14,550 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,430-2,530 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,430-2,575 रुपये प्रति टिन।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 15,800 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 15,700 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 12,200 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 13,850 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 15,600 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 15,650 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 14,500 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 7,150-7,200 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 6,800-6,875 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण


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