दिवाला मामलों के लिए संसदीय समिति ने दिया एनसीएलटी की प्रतिबद्ध पीठ स्थापित करने का सुझाव

दिवाला मामलों के लिए संसदीय समिति ने दिया एनसीएलटी की प्रतिबद्ध पीठ स्थापित करने का सुझाव

दिवाला मामलों के लिए संसदीय समिति ने दिया एनसीएलटी की प्रतिबद्ध पीठ स्थापित करने का सुझाव
Modified Date: August 30, 2026 / 02:51 pm IST
Published Date: August 30, 2026 2:51 pm IST

नयी दिल्ली, 30 अगस्त (भाषा) संसद की एक समिति ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में दिवाला मामलों के तेजी से निपटारे के लिए प्रतिबद्ध पीठ की स्थापना का सुझाव दिया है। एनसीएलटी की प्रधान पीठ और नयी दिल्ली पीठ के अलावा उसकी इलाहाबाद, अहमदाबाद, बेंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, कटक, हैदराबाद, इंदौर, कोलकाता, कोच्चि और मुंबई में पीठ हैं।

ये सिफारिशें कार्मिक, लोक शिकायत, कानून एवं न्याय संबंधी संसदीय स्थायी समिति द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट का हिस्सा हैं। ‘देश में न्यायाधिकरण प्रणाली के कामकाज की समीक्षा’ पर यह रिपोर्ट इस महीने की शुरुआत में संसद में पेश की गई थी।

समिति ने कहा कि न्यायाधिकरण के लगातार बढ़ते दिवाला क्षेत्राधिकार से कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत उसकी समान रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां कमजोर नहीं पड़नी चाहिए। इन जिम्मेदारियों में विलय और अधिग्रहण, कॉरपोरेट प्रशासन तथा हितधारकों के हितों के संरक्षण से संबंधित मामले शामिल हैं।

समिति ने सिफारिश की कि कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय न्यायाधिकरण के भीतर पर्याप्त न्यायिक व तकनीकी सदस्यों, रजिस्ट्री सहायता और बुनियादी ढांचे के साथ प्रतिबद्ध आईबीसी पीठ की स्थापना की व्यवहार्यता की जांच करे। अब न्यायाधिकरण के कुल मामलों में आधे से अधिक मामले दिवाला कार्यवाही के हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘इस तरह का एक विशेषज्ञ तंत्र दिवाला मामलों के तेज निपटारे की सुविधा प्रदान करेगा और साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि न्यायाधिकरण के कंपनी कानून क्षेत्राधिकार पर समान रूप से ध्यान दिया जाए।’’

भाषा पाण्डेय अजय

अजय


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