मुंबई, 17 मार्च (भाषा) सरकारी बॉन्ड बाजार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी धीरे-धीरे बढ़ रही है और द्वितीयक बाजार की गतिविधियों में तेज वृद्धि देखी जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक के नवीनतम रिटेल डायरेक्ट आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
आरबीआई रिटेल डायरेक्ट मंच पर द्वितीयक बाजार खंड में कारोबार की मात्रा पिछले एक वर्ष में 3.7 गुना बढ़ गई है। यह सरकारी प्रतिभूतियों में व्यक्तिगत निवेशकों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है। रिटेल डायरेक्ट मंच के माध्यम से आसान पहुंच और बेहतर नकदी से इसे समर्थन मिल रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, आरबीआई रिटेल डायरेक्ट मंच पर कुल कारोबार की मात्रा 16 मार्च, 2026 को बढ़कर 8,211.91 करोड़ रुपये हो गई, जो एक वर्ष पहले 1,756.08 करोड़ रुपये थी।
रॉकफोर्ट फिनकैप एलएलपी के संस्थापक और प्रबंध भागीदार वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा, ‘‘सबसे उल्लेखनीय द्वितीयक बाजार में कारोबार की मात्रा में तीव्र वृद्धि है। यह दर्शाता है कि खुदरा निवेशक प्राथमिक सदस्यता तक ही सीमित रहने के बजाय सरकारी प्रतिभूतियों में खरीद-बिक्री करने में धीरे-धीरे अधिक सहज हो रहे हैं।’’
कुल कारोबार में केंद्र सरकार की दिनांकित प्रतिभूतियों का हिस्सा सर्वाधिक 8,059.96 करोड़ रुपये था। इसके बाद राज्य सरकार की प्रतिभूतियों का कारोबार 82.23 करोड़ रुपये, ट्रेजरी बिल 59.95 करोड़ रुपये और सरकारी स्वर्ण बॉन्ड का कारोबार 9.77 करोड़ रुपये रहा।
आरबीआई की रिटेल डायरेक्ट योजना खुदरा निवेशकों सीधे मंच के माध्यम से सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने में मदद करती है।
श्रीनिवासन ने कहा कि राज्य सरकार की प्रतिभूतियों में अपेक्षाकृत कम भागीदारी आश्चर्यजनक है, क्योंकि राज्य विकास ऋण आमतौर पर सरकारी प्रतिभूतियों की तुलना में 0.50 से 0.80 प्रतिशत का रिटर्न देते हैं। इससे संकेत मिलता है कि खुदरा निवेशक अतिरिक्त रिटर्न की तुलना में नकदी और पारदर्शिता को प्राथमिकता दे रहे हैं।
प्राथमिक बाजार में, कुल अभिदान बढ़कर लगभग 8,414.95 करोड़ रुपये हो गया जो एक साल पहले इसी अवधि में 6,245.18 करोड़ रुपये था। इसमें ट्रेजरी बिल का सबसे बड़ा हिस्सा रहा, जो निवेशकों की कम अवधि और सरल साधनों के प्रति प्राथमिकता को बताता है।
पिछले कुछ हफ्तों में, पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण सरकारी प्रतिभूतियों पर प्रतिफल अधिक रहा है।
वर्तमान में, 10-वर्षीय मानक बॉन्ड प्रतिफल 6.7118 प्रतिशत पर है।
भाषा रमण अजय
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