बमाको, दो मई (एपी) माली में अलगाववादी विद्रोहियों ने शुक्रवार को कहा कि देश की सेना और उनके रूसी सहयोगियों के पीछे हटने के बाद उन्होंने उत्तरी शहर टेसालिट में एक सामरिक सैन्य शिविर पर कब्जा कर लिया है।
अलगाववादी समूह ‘अजावाद लिबरेशन फ्रंट’ का यह दावा माली के सत्तारूढ़ सैन्य शासन के लिए एक और झटका है। इस सप्ताह की शुरुआत में सैन्य शासन ने प्रमुख शहर किडाल पर अपना नियंत्रण खो दिया। इससे पहले, हमले में माली के रक्षा मंत्री सादियो कामरा की मौत हो गई थी।
इस बीच अलगाववादियों ने देश में पिछले एक दशक से अधिक समय में सबसे बड़े हमलों का दौर शुरू किया है।
स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, माली की सेना और रूस की अफ्रीका कोर के सदस्य बृहस्पतिवार को टेसालिट से पीछे हट गए।
अजावाद लिबरेशन फ्रंट (एफएलए) अल-कायदा समर्थित जमात नुसरत अल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन (जेएनआईएम) के साथ मिलकर लड़ रहा है।
एफएलए के शीर्ष ‘कमांडर’ अचाफघी अग बौहांदा ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में टेसालिट शिविर पर कब्जा करने की घोषणा की। यह सैन्य शिविर हवाई अड्डे और अल्जीरिया की सीमा के निकट सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है।
‘एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) इस सैन्य शिविर की स्थिति की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका क्योंकि यह सैन्य शिविर ऐसे क्षेत्र में स्थित है जहां इंटरनेट सेवा सुचारू नहीं है। माली के अधिकारियों ने इस मामले में टिप्पणी के अनुरोधों का तुरंत जवाब नहीं दिया।
हालांकि अधिकारियों ने शुक्रवार देर रात कहा कि माली के कुछ सैन्य अधिकारियों ने जिहादियों और अलगाववादियों के साथ मिलकर काम किया।
माली में 2020 के तख्तापलट के बाद से सेना का शासन रहा है और सहारा रेगिस्तान के दक्षिण में स्थित विस्तृत साहेल क्षेत्र में जिहादी समूहों के विस्तार के कारण यह देश लंबे समय से हिंसा का शिकार रहा है।
बमाको की सैन्य अदालत में लोक अभियोजक द्वारा दिए बयान में कहा गया कि जांच के दौरान इस तरह के हमलों में ‘‘कुछ सैन्य कर्मियों की मिलीभगत के संबंध में ठोस सबूत’’ मिले हैं, जिनमें सेवारत और हाल में बर्खास्त किए गए अधिकारी शामिल हैं।
एपी सुरभि सिम्मी
सिम्मी