पेट्रोल, डीजल की कीमत तीन रुपये प्रति लीटर बढ़ी, सीएनजी दो रुपये प्रति किलोग्राम हुई महंगी

पेट्रोल, डीजल की कीमत तीन रुपये प्रति लीटर बढ़ी, सीएनजी दो रुपये प्रति किलोग्राम हुई महंगी

पेट्रोल, डीजल की कीमत तीन रुपये प्रति लीटर बढ़ी, सीएनजी दो रुपये प्रति किलोग्राम हुई महंगी
Modified Date: May 15, 2026 / 01:40 pm IST
Published Date: May 15, 2026 1:40 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) पेट्रोल और डीजल की कीमतों में शुक्रवार को तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई। यह पिछले चार वर्षों में पेट्रोल-डीजल के दाम में पहली वृद्धि है। कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों के कारण तेल विपणन कंपनियों का घाटा बढ़ने के बीच यह वृद्धि की गई है।

इसके साथ ही, दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में सीएनजी की कीमतों में दो रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई।

उद्योग जगत से जुड़े सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर हो गई है। डीजल अब 87.67 रुपये के मुकाबले 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

दरें राज्यों में मूल्य वर्धित कर (वैट) के अंतर के कारण अलग-अलग होती हैं।

दिल्ली में अब सीएनजी की कीमत 79.09 रुपये प्रति किलोग्राम और मुंबई में 84 रुपये प्रति किलोग्राम है। हालांकि, घरों में खाना पकाने के लिए पाइप से मुहैया कराई जाने वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) और घरेलू खाना पकाने वाली गैस एलपीजी दोनों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजराइल हमले के बाद और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद से 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इस युद्ध से होर्मुज जलडमरूमध्य अवरूद्ध हो गया जिससे दुनिया के तेल एवं गैस का पांचवां हिस्सा गुजरता है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद खुदरा ईंधन दरों को स्थिर रखा गया जिसे सरकार ने मूल्य-संवेदनशील उपभोक्ताओं को बढ़ती वैश्विक ऊर्जा लागत से बचाने का प्रयास बताया। हालांकि, विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक कारणों से प्रेरित कदम माना क्योंकि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे थे।

ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद की गई। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल सहित पांच में से तीन राज्यों में जीत हासिल कर अपना प्रभाव बढ़ाया।

इस बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें अब मई 2022 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।

कीमतें अप्रैल 2022 से स्थिर थीं। हालांकि मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पेट्रोल और डीजल दोनों में दो रुपये प्रति लीटर की एकमुश्त कटौती की गई थी। आखिरी बार दरों में बढ़ोतरी अप्रैल 2022 में हुई थी।

मुंबई में पेट्रोल अब 106.68 रुपये प्रति लीटर और डीजल 93.14 रुपये प्रति लीटर हो गया है। कोलकाता में पेट्रोल 108.74 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.13 रुपये प्रति लीटर है, जबकि चेन्नई में पेट्रोल 103.67 रुपये और डीजल 95.25 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

शुक्रवार का यह कदम मार्च में घोषित उत्पाद शुल्क कटौती के बाद उठाया गया है और ऐसे समय में आया है जब सरकार ईंधन खपत को कम करने और देश की तेल आयात लागत को नियंत्रित करने के लिए उपाय लागू कर रही है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस सप्ताह ईंधन बचत, घर से काम करने और यात्रा कम करने की अपील की थी क्योंकि ऊर्जा की ऊंची कीमतें भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाल रही हैं और लगातार तीसरे वर्ष चालू खाते के घाटे को बढ़ाने का खतरा उत्पन्न कर रही हैं।

कुछ राज्य सरकारों ने पहले ही विभागों के कर्मचारियों को यात्रा सीमित करने, भौतिक बैठकों से बचने और कम कर्मचारियों के साथ कार्यालय संचालन के निर्देश दिए हैं।

विश्लेषकों ने कहा कि ईंधन कीमतों में वृद्धि और बचत उपायों के संयुक्त प्रभाव से मांग वृद्धि पर असर पड़ सकता है।

रेटिंग एजेंसी इक्रा लिमिटेड में कॉरपोरेट रेटिंग्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि यह ‘‘मामूली’’ बढ़ोतरी तेल विपणन कंपनियों को सीमित राहत देती है।

उन्होंने कहा, ‘‘ इक्रा का अनुमान है कि 105-110 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल कच्चे तेल की कीमत से तेल विपणन कंपनियों को वाहन ईंधन और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर प्रतिदिन लगभग 500 करोड़ रुपये का नुकसान होता है…. ऐसे में यदि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बनी रहती हैं तो कंपनियों को खुदरा कीमतों की फिर से समीक्षा करनी होगी।’’

निजी ईंधन खुदरा कंपनियों ने पहले ही कीमतें बढ़ा दी थीं। नायरा एनर्जी ने मार्च में पेट्रोल पांच रुपये और डीजल तीन रुपये प्रति लीटर बढ़ाया था, जबकि शेल ने एक अप्रैल से पेट्रोल 7.41 रुपये और डीजल 25 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया था। बेंगलुरु में शेल पेट्रोल 119.85 रुपये प्रति लीटर और डीजल 123.52 रुपये प्रति लीटर पर बेचता है।

घरेलू रसोई गैस एलपीजी की कीमतें मार्च में 60 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाई गई थीं लेकिन वे अब भी वास्तविक लागत से काफी कम हैं। तेल कंपनियों को 14.2 किलोग्राम के एक एलपीजी सिलेंडर पर 674 रुपये का नुकसान हो रहा है।

उद्योग सूत्रों ने बताया कि यह बढ़ोतरी संतुलित है। यह तेल कंपनियों पर मुनाफा दबाव आंशिक रूप से कम करने के लिए पर्याप्त लेकिन बड़े मुद्रास्फीति झटके से बचाने के लिए सीमित है।

उन्होंने कहा कि हालांकि, इसका मुद्रास्फीति पर कुछ असर होगा।

भारत की खुदरा मुद्रास्फीति अप्रैल 2026 में बढ़कर 3.48 प्रतिशत हो गई जो मार्च में 3.40 प्रतिशत थी। वहीं थोक मुद्रास्फीति 42 महीने के उच्च स्तर 8.3 प्रतिशत पर पहुंच गई।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में पेट्रोल व डीजल की अलग से कोई स्वतंत्र श्रेणी नहीं है, बल्कि इन्हें व्यापक ‘‘परिवहन एवं संचार’’ घटक और ‘‘ईंधन एवं ऊर्जा’’ श्रेणी के अंतर्गत शामिल किया जाता है। पेट्रोल और डीजल का प्रत्यक्ष भार अपेक्षाकृत कम होता है लेकिन परिवहन से जुड़े मदों के माध्यम से इनका प्रभाव महत्वपूर्ण रहता है।

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, ईंधन कीमतों में वृद्धि का व्यापक अप्रत्यक्ष प्रभाव होता है क्योंकि इससे विभिन्न क्षेत्रों में माल ढुलाई, लॉजिस्टिक्स और कच्चे माल की लागत बढ़ जाती है।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


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