पीएफसी परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को वित्त पोषित करने को उत्सुक, सरकार से नीतिगत स्पष्टता का इंतजार
पीएफसी परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को वित्त पोषित करने को उत्सुक, सरकार से नीतिगत स्पष्टता का इंतजार
कोलकाता, 15 जनवरी (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) की चेयरपर्सन परमिंदर चोपड़ा ने बृहस्पतिवार को कहा कि कंपनी परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए तैयार है लेकिन सरकार के स्पष्ट नीतिगत ढांचा तैयार करने के बाद ही वह आगे बढ़ेगी।
चोपड़ा ने कहा कि परमाणु परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए व्यवहार्यता एवं राजस्व निश्चितता का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन आवश्यक होगा जिसमें ईंधन की ‘सोर्सिंग’ और बिजली की खपत की व्यवस्था पर स्पष्टता शामिल है।
उन्होंने 5,000 करोड़ रुपये तक के तीसरे कर योग्य गैर परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) पेश किये जाने के अवसर पर कहा, ‘‘ हमें इसकी व्यवहारिकता देखनी होगी और राजस्व का आश्वासन प्राप्त करना होगा कि उन्हें ईंधन कहां से मिलेगा और वे किसे बिजली की आपूर्ति करेंगे।’’
कंपनी इस क्षेत्र के वित्तपोषण के लिए अपनी आंतरिक नीतियां बनाने से पहले सरकारी दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रही है।
चोपड़ा ने कहा, ‘‘ सरकार की नीतिगत स्थिति स्पष्ट होने पर, हम उन्हीं दिशा-निर्देशों के आधार पर आंतरिक नीतियां बनाएंगे।’’
उन्होंने कहा कि नीतिगत माहौल बनने के बाद पीएफसी अपनी मौजूदा मूल्यांकन प्रणाली पर ही निर्भर रहेगी।
केंद्रीय बजट 2025-26 में भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा बदलाव रणनीति के तहत परमाणु ऊर्जा की ओर महत्वपूर्ण कदम उठाने की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। सरकार ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
इस बीच, चोपड़ा ने पीएफसी की परिसंपत्ति गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार का जिक्र भी किया। कंपनी का शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) अनुपात घटकर वर्तमान में 0.37 प्रतिशत हो गया है।
उन्होंने 2010 के दशक के मध्य में देखी गई कठिनाई का कारण उच्चतम न्यायालय द्वारा कोयला खदानों के आवंटन में बदलाव को बताया जिसके परिणामस्वरूप बिजली खरीद समझौते रद्द हो गए और कई परियोजनाएं अव्यवहार्य हो गईं।
चोपड़ा ने कहा कि शेष 10,400 करोड़ रुपये के फंसे ऋण केवल निजी क्षेत्र से हैं। इनमें से 80 प्रतिशत के लिए पूरी तरह से प्रावधान किया गया है जिसमें संपत्तियां या तो पहले से ही परिसमापन के तहत हैं या समाधान की प्रक्रिया से गुजर रही हैं। शेष करीब 2,000 करोड़ रुपये के एनपीए ऋण के पुनर्गठन के लिए बातचीत जारी है।
भाषा निहारिका रमण
रमण

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