राजमार्गों पर आवारा पशुओं के बारे में आगाह करने वाली अलर्ट प्रणाली का पायलट परीक्षण शुरू

राजमार्गों पर आवारा पशुओं के बारे में आगाह करने वाली अलर्ट प्रणाली का पायलट परीक्षण शुरू

राजमार्गों पर आवारा पशुओं के बारे में आगाह करने वाली अलर्ट प्रणाली का पायलट परीक्षण शुरू
Modified Date: January 14, 2026 / 10:09 pm IST
Published Date: January 14, 2026 10:09 pm IST

नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा) भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की अचानक आवाजाही से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से दो राजमार्ग गलियारों पर आवारा पशुओं की मौजूदगी की तत्काल चेतावनी देने वाली एक पायलट परियोजना शुरू की है।

एनएचएआई ने बुधवार को एक बयान में कहा कि यह पायलट परियोजना जयपुर-आगरा और जयपुर-रेवाड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारे पर चालू की गई है। इस पहल के तहत रिलायंस जियो ने अपने मंच को उन्नत बनाया है, ताकि वास्तविक समय में आवारा पशु से संबंधित सुरक्षा अलर्ट देशभर में उपलब्ध कराए जा सकें।

पिछले महीने एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर दूरसंचार आधारित सुरक्षा अलर्ट प्रणाली शुरू करने के लिए रिलायंस जियो के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। इस पहल का मकसद खासतौर पर कोहरे और कम दृश्यता वाली स्थितियों में आवारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना है।

 ⁠

एनएचएआई ने कहा, ‘पायलट परियोजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग से होकर गुजरने वाले लोगों को उच्च जोखिम वाले हिस्सों से करीब 10 किलोमीटर पहले स्थान-आधारित अलर्ट भेजे जाएंगे, जिससे वाहन चालकों को सावधानी बरतने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।’

बयान के मुताबिक, यात्रियों तक प्रभावी ढंग से संदेश पहुंचाने के लिए पहले फ्लैश एसएमएस और उसके बाद वॉयस अलर्ट जारी किया जाएगा। फ्लैश एसएमएस हिंदी में होगा जिसमें जिक्र होगा कि ‘आगे आवारा पशु ग्रस्त क्षेत्र है। कृपया धीरे और सावधानी से चलें।’

बार-बार संदेश आने से बचाने के लिए एक ही उपयोगकर्ता को 30 मिनट के भीतर दोबारा अलर्ट नहीं भेजा जाएगा।

ये अलर्ट ऐतिहासिक दुर्घटना आंकड़ों और जमीनी स्तर से मिले इनपुट के आधार पर चिन्हित आवारा पशु-संभावित क्षेत्रों में जारी किए जाएंगे और इन्हें उन्नत दूरसंचार ढांचे के जरिये यात्रियों तक पहुंचाया जाएगा।

एनएचएआई ने कहा कि पायलट परियोजना के परिणामों के आधार पर इसे आवारा पशुओं से प्रभावित देश के अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने की संभावना पर विचार किया जाएगा।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण


लेखक के बारे में