समुद्री खाद्य क्षेत्र के एमएसएमई के लिए पीएलआई योजना लाने पर विचार : वाणिज्य मंत्रालय
समुद्री खाद्य क्षेत्र के एमएसएमई के लिए पीएलआई योजना लाने पर विचार : वाणिज्य मंत्रालय
नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) मत्स्य विभाग समुद्री खाद्य क्षेत्र के सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए उत्पादन-से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना बनाने की संभावनाओं पर विचार करेगा। बृहस्पतिवार को जारी एक सरकारी बयान में यह जानकारी दी गई।
बयान में कहा गया है कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता को बेहतर बनाना, निर्यात-उन्मुख बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, प्रौद्योगिकी की स्वीकार्यता को बढ़ावा देना, शोध एवं विकास में सहायता करना और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देना है।
वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, ‘‘मत्स्य विभाग, समुद्री खाद्य क्षेत्र के एमएसएमई के लिए एक विशेष पीएलआई योजना विकसित करने की संभावनाओं पर विचार करेगा।’’
मंत्रालय ने बताया कि प्रस्तावित रूपरेखा का उद्देश्य भारत के कुल समुद्री खाद्य (सीफूड) निर्यात में मूल्यवर्धित उत्पादों की हिस्सेदारी को बढ़ाना है, और साथ ही निर्यातकों की संख्या को मौजूदा के लगभग 1,200 से बढ़ाकर आने वाले वर्षों में 5,000 तक पहुंचाना है।
घरेलू विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार पहले ही 14 क्षेत्रों के लिए पीएलआई योजना लागू कर चुकी है, जिसके लिए 1.97 लाख करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इन क्षेत्रों में रेफ्रिजरेटर, एसी जैसे ‘व्हाइट गुड्स’, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्युटिकल्स शामिल हैं।
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह के बीच हुई एक बैठक के दौरान मत्स्यपालन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।
दोनों मंत्रियों ने भारत के समुद्री खाद्य क्षेत्र की विकास गति को तेज करने और देश की वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत बनाने के लिए एक रूपरेखा तैयार करने पर चर्चा की।
इस बात पर सहमति बनी कि मूल्यवर्धन, बुनियादी ढांचे के विकास, उत्पादों में विविधता लाने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने, बाजार का विस्तार करने, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने (डीप-सी फिशिंग) और अंशधारकों की अधिक भागीदारी पर केंद्रित एक समन्वित रणनीति के माध्यम से सीफूड निर्यात में वृद्धि को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाएगा।
इसी पहल के तहत, 5-6 जून, 2026 को विशाखापत्तनम में दोनों मंत्रालयों द्वारा संयुक्त रूप से दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया जाएगा।
इस बैठक में जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) और मछली पकड़ने (कैप्चर फिशरीज़) से जुड़े स्वच्छता और पादप-स्वच्छता (एसपीएस) संबंधी मुद्दों को हल करने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
भारत के समुद्री उत्पादों के निर्यात ने एक अभूतपूर्व मील का पत्थर हासिल किया है, जिसमें वर्ष 2025-26 में समुद्री भोजन का निर्यात अब तक के उच्चतम स्तर 72,325.82 करोड़ रुपये (8.28 अरब डॉलर) तक पहुंच गया है।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय

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