पटना, 20 सितंबर (भाषा) बिहार की सभी 8,400 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां (पैक्स) जल्द ही साझा सेवा केंद्र (सीएससी) के रूप में काम करना शुरू कर देंगी। ये केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक सुविधाएं, आधार नामांकन, ट्रेन आरक्षण और हवाई टिकट जैसी 300 से अधिक सेवाएं प्रदान करेंगी।
बिहार के सहकारिता मंत्री सुरेंद्र यादव ने बुधवार को कहा कि राज्य में सहकारी आंदोलन को मजबूत करने के लिए नए पेट्रोल/डीजल डीलरशिप और एलपीजी वितरक के आवंटन में पैक्स को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
पैक्स जमीनी स्तर की सहकारी ऋण संस्थाएं हैं जो किसानों को विभिन्न कृषि और कृषि गतिविधियों के लिए अल्पकालिक और मध्यम अवधि के कृषि ऋण प्रदान करती हैं।
पैक्स में व्यवसाय विविधीकरण पर एक दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए, मंत्री ने कहा, “पैक्स को मजबूत करने के लिए, राज्य सरकार ने उन्हें साझा सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। ये केंद्र गांवों में लोगों को 300 सामान्य सेवाएं प्रदान करेगा। 1000 पैक्स को साझा सेवा केंद के रूप में विकसित करने का काम पहले ही शुरू हो चुका है… शेष 7400 पैक्स को भी जल्द ही ऐसे केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।”
इस अवसर पर बिहार सहकारिता विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) दीपक कुमार सिंह ने कहा, “राज्य सरकार सहकारी क्षेत्र से जुड़े पक्षों के कल्याण के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। नई पेट्रोल/डीजल डीलरशिप के आवंटन में पैक्स को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे सहकारी आंदोलन मजबूत होगा। सभी 8,400 पैक्स राज्य में ग्रामीण विकास का आर्थिक केंद्र बनेंगे।”
उन्होंने कहा कि राज्य भर में पैक्स बहुआयामी इकाइयों के रूप में कार्य करेंगे और इससे जुड़े लोगों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सिंह ने कहा कि बिहार में पैक्स के कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसकी पूरी प्रणाली को डिजिटल किया जा रहा है।
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अर्पणा रमण
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