कोविड के बाद वृद्धि को कायम रखने को निजी उपभोग, निवेश महत्वपूर्ण : रिजर्व बैंक

कोविड के बाद वृद्धि को कायम रखने को निजी उपभोग, निवेश महत्वपूर्ण : रिजर्व बैंक

कोविड के बाद वृद्धि को कायम रखने को निजी उपभोग, निवेश महत्वपूर्ण : रिजर्व बैंक
Modified Date: November 29, 2022 / 08:16 pm IST
Published Date: May 27, 2021 10:50 am IST

नयी दिल्ली, 27 मई (भाषा) कोविड-19 की दूसरी लहर के चलते पैदा हुई अनिश्चितता के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि महामारी के बाद आर्थिक वृद्धि को कायम रखने के लिए निजी उपभोग और निवश में टिकाऊ पुनरोद्धार महत्वपूर्ण होगा।

भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के बीच चालू वित्त वर्ष 2021-22 के लिए वृद्धि दर के अनुमानों में संशोधन किए जा रहे हैं।

केंद्रीय बैंक की बृहस्पतिवार को जारी 2020-21 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल ने अर्थव्यवस्था पर एक ‘घाव’ छोड़ दिया है। ‘‘दूसरी लहर के बीच व्यापक निराशा को टीकाकरण अभियान के चलते सतर्कता भरी उम्मीद से दूर करने में मदद मिल रही है।’’

केंद्रीय बैंक ने कहा कि दूसरी लहर के साथ ही वृद्धि दर अनुमानों में संशोधनों का दौर शुरू हो गया है। 2021-22 के लिए आम सहमति रिजर्व बैंक के पूर्व के 10.5 प्रतिशत के अनुमान पर टिकती दिख रही है।

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वृद्धि दर 26.2 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 8.3 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 5.4 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी परिदृश्य के समक्ष सबसे बड़ा जोखिम है। सरकार द्वारा निवेश बढ़ाने, क्षमता का इस्तेमाल अधिक होने तथा पूंजीगत सामान के आयात बेहतर रहने से अर्थव्यवस्था में सुधार की गुंजाइश बन रही है।

संकट के बाद आर्थिक वृद्धि को कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है, इस पर वार्षिक रिपोर्ट में अलग से कहा गया है, ‘‘कोविड-19 के बाद सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर को कायम रखने के लिए निजी उपभोग और निवेश मांग में टिकाऊ पुनरोद्धार महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि जीडीपी में इनका करीब 85 प्रतिशत का हिस्सा है।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि संकट के बाद सामान्य तौर पर पुनरोद्धार की अगुवाई निवेश की तुलना में उपभोग करता है। ‘‘हालांकि, निवेश आधारित सुधार अधिक टिकाऊ होता है और साथ ही यह बेहतर रोजगार सृजन के जरिये टुकड़ों में उपभोग भी बढ़ा सकता है।’’

रिजर्व बैंक ने अन्य बैंकों को आगाह किया है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के वर्गीकरण पर रोक हटाए जाने तथा कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच वे डूबे कर्ज के लिए ऊंचे प्रावधान को तैयार रहें।

केंद्रीय बैंक का मानना है कि महामारी के खिलाफ व्यक्तिगत देशों के संघर्ष के बजाय सामूहिक वैश्विक प्रयासों से निश्चित रूप से बेहतर नतीजे हासिल होंगे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021-22 में मौद्रिक नीति का रुख वृहद आर्थिक स्थिति पर निर्भर करेगा। नीति मुख्य रूप से वृद्धि को समर्थन देने वाली रहेगी।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि दूसरी लहर में संक्रमण की दर काफी चिंताजनक है। इतनी तेजी से बढ़ते संक्रमण के बीच स्वास्थ्य ढांचे को क्षमता के लिहाज से विस्तारित करना पड़ रहा है।

रिजर्व बैंक ने कहा आगे चलकर वृद्धि लौटने और अर्थव्यवस्था के पटरी पर आने की स्थिति में यह महत्वपूर्ण होगा कि सरकार बाहर निकलने की एक स्पष्ट नीति का पालन करे और राजकोषीय बफर बनाए जिसका इस्तेमाल भविष्य में वृद्धि को लगने वाले झटकों की स्थिति में किया जाए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल और मई की शुरुआत के लिए उच्च चक्रीय संकेत मिलीजुली तस्वीर दर्शाते हैं।

अप्रैल में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) का संग्रहण लगातार सातवें महीने एक लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है। इससे पता चलता है कि विनिर्माण और सेवा उत्पादन कायम है।

भाषा अजय अजय पाण्डेय

पाण्डेय


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