नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने खुद को बदलने की क्षमता साबित की है और अब उन्हें अपनी संस्थागत मजबूती को बड़ी महत्वाकांक्षा, प्रतिस्पर्धात्मकता और नेतृत्व में बदलने पर ध्यान देना चाहिए।
सीतारमण ने यहां ‘पीएसबी कॉन्फ्लूएंस’ के समापन सत्र में कहा कि बैंक और वित्तीय संस्थानों को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को आकार देने, वित्तपोषित करने और उसे सक्षम बनाने में मदद करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक बैंकों के पास बड़ा ग्राहक आधार, व्यापक शाखा नेटवर्क, देशभर में मौजूदगी, मजबूत संस्थागत अनुभव और बढ़ती डिजिटल क्षमताएं हैं। इन खूबियों को ऐसे कारोबार और ग्राहक वर्गों में मजबूत प्रतिस्पर्धी स्थिति में बदलना चाहिए, जहां बैंक नेतृत्व कर सकते हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि हर बैंक को प्रत्येक अवसर का लाभ उठाने के लिए एक ही रणनीति अपनाने की जरूरत नहीं है। हरेक बैंक को अपनी विशिष्ट ताकत की पहचान कर उन पर आगे बढ़ना चाहिए, चाहे वे भौगोलिक मौजूदगी, ग्राहक संबंध, क्षेत्रीय विशेषज्ञता, प्रौद्योगिकी क्षमता या अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी से जुड़ी हों।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सामूहिक रूप से मजबूत होने के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्टता और नेतृत्व की विशिष्ट क्षमता भी विकसित करें। इससे समग्र रूप से एक मजबूत और अधिक प्रतिस्पर्धी सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था तैयार होगी।’’
सीतारमण ने कहा कि पीएसबी इस समय काफी मजबूत स्थिति में हैं और अब इस ताकत का इस्तेमाल अधिक महत्वाकांक्षा के साथ करने की जरूरत है। उन्हें अवसरों की पहले पहचान करने, मांग बढ़ने से पहले क्षमताएं विकसित करने और भारत की आर्थिक वृद्धि के अगले चरण में अग्रणी भूमिका बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए।
वित्त मंत्री की यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस बयान के कुछ दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि विकसित भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ने के साथ कम-से-कम एक भारतीय बैंक दुनिया के शीर्ष पांच बैंकों में होना चाहिए।
इस सम्मेलन में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के करीब 125 वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में जमा राशि जुटाने, युवाओं के लिए बैंकिंग, निवेश चक्र को समर्थन, वैश्विक क्षमता केंद्रों, कृषि एवं बागवानी, क्रेडिट कार्ड कारोबार और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण समेत सात विषयों पर चर्चा हुई।
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