युवाओं की अपेक्षाओं के अनुरूप सेवाएं मुहैया कराएं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकः सीतारमण

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युवाओं की अपेक्षाओं के अनुरूप सेवाएं मुहैया कराएं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकः सीतारमण

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  • Publish Date - August 18, 2026 / 09:51 PM IST,
    Updated On - August 18, 2026 / 09:51 PM IST

नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) से युवाओं, खासकर ‘जेन जी’ की अपेक्षाओं के अनुरूप अपनी सेवाओं को सरल, सहज, व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप और चौबीसों घंटे उपलब्ध बनाने को कहा।

इसके साथ ही, सीतारमण ने पीएसबी से युवाओं के बीच अपनी ‘सरकारी बैंक’ की छवि बदलने और उन्हें बैंकिंग के लिए पहली एवं सबसे भरोसेमंद पसंद बनाने पर भी जोर दिया।

वित्त मंत्री ने दो-दिवसीय ‘पीएसबी कॉन्फ्लूएंस’ के समापन सत्र में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को युवाओं से सीधे संवाद कर उनकी अपेक्षाओं को समझना चाहिए और बैंकिंग को उनके लिए अधिक आकर्षक बनाना चाहिए। उन्होंने साथ ही बैंकिंग में जरूरी सतर्कता और गंभीरता बनाए रखने पर जोर दिया।

सीतारमण ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की अब भी ‘सरकारी बैंक’ वाली छवि है और युवा ग्राहक निजी बैंकों को अधिक आकर्षक मानते हैं। उन्होंने युवाओं के साथ हाल में हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि कुछ युवाओं ने निजी बैंकों को खाता खोलने के लिए पसंदीदा बताया क्योंकि वे उन्हें ‘कूल’ मानते हैं।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को ‘कूल’ और सतर्क बैंकिंग के बीच संतुलन बनाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हमें युवाओं की अपेक्षाओं के अनुरूप आगे बढ़ना चाहिए।’’

सीतारमण ने कहा कि बैंकों को युवाओं के शाखाओं में आने का इंतजार करने के बजाय सीधे उनके बीच जाना चाहिए। कॉलेज, विश्वविद्यालय, कौशल विकास संस्थान और अन्य परिसर बैंक खाता खोलने, वित्तीय जागरूकता और सीधे संवाद के लिए महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं।

उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से दो अक्टूबर, 2026 से एक महीने का ‘बैंकिंग फॉर यूथ’ अभियान शुरू करने को कहा। इसमें 16 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

सीतारमण ने कहा कि सभी 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अपने उत्पादों, क्षेत्रीय मौजूदगी और संस्थागत क्षमताओं के आधार पर युवाओं को आकर्षित करने और उनसे जुड़ने की अलग रणनीति बनानी चाहिए। व्यापक उद्देश्य केवल एक बार खाता खोलने तक सीमित न रहकर ‘परिसर से करियर और उसके बाद तक’ दीर्घकालिक बैंकिंग संबंध बनाने का होना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक युवा भारतीयों की पहली और सबसे भरोसेमंद पसंद होने चाहिए, चाहे वे अपना पहला खाता खोल रहे हों, पहली तनख्वाह पा रहे हों, उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हों, उद्यम शुरू कर रहे हों या अपना पहला निवेश कर रहे हों।’’

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में है और युवा देश में उपभोग, बचत, निवेश, उद्यमिता और संपत्ति सृजन के तौर-तरीकों को तेजी से प्रभावित करेंगे।

उन्होंने कहा कि वित्तीय समझ वयस्क होने की प्रक्रिया के साथ सहज रूप से विकसित होनी चाहिए, न कि पहली नौकरी शुरू करने के बाद अचानक और तनावपूर्ण तरीके से इसकी जरूरत महसूस हो।

उन्होंने बैंकों को युवाओं के साथ जुड़ने के लिए प्रतिष्ठित शैक्षणिक मंचों और संस्थानों के सहयोग से मुफ्त ऑनलाइन सीखने की सामग्री उपलब्ध कराने का सुझाव दिया।

उन्होंने बैंकिंग सेवाओं के साथ जीवनशैली से जुड़े लाभ देने का भी सुझाव दिया, जिनमें फिटनेस केंद्र, योग केंद्र और विश्वसनीय मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण मंचों के कूपन या वाउचर शामिल हो सकते हैं।

सीतारमण ने बैंक शाखाओं में ‘युवा कियोस्क’ या ‘युवा बैंकिंग मित्र’ जैसे समर्पित केंद्र स्थापित करने का सुझाव दिया, जहां एक समर्पित कर्मचारी युवाओं को उनकी वित्तीय यात्रा में मार्गदर्शन दे सके।

उन्होंने युवाओं में औपचारिक ऋण व्यवस्था के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया। इसमें क्रेडिट स्कोर, विभिन्न बैंक ऋण उत्पादों और सरकारी ऋण योजनाओं की जानकारी शामिल है। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं को भविष्य में उद्यम शुरू करने के लिए आसानी से वित्त उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

सीतारमण ने बैंकों से युवाओं को अच्छे क्रेडिट स्कोर और क्रेडिट इतिहास बनाए रखने के महत्व के बारे में जागरूक करने को भी कहा।

उन्होंने भारतीय बैंक संघ (आईबीए) से युवाओं में बैंकिंग जागरूकता के लिए एक समर्पित पोर्टल शुरू करने की संभावना तलाशने को कहा। यह पोर्टल युवाओं को उनकी जरूरत के अनुरूप बैंकिंग सेवाओं और वित्तीय अवसरों की जानकारी देने तथा संबंधित बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने के लिए एकल मंच के रूप में काम कर सकता है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय